प्रधानमंत्री मोदी पर सोशल मीडिया पोस्ट: प्रोफेसर मधु किश्वर ने FIR रद्द कराने के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया

Update: 2026-08-12 07:55 GMT

शिक्षाविद् मधु पूर्णिमा किश्वर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित एक वीडियो पर सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चंडीगढ़ पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR को रद्द कराने के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया।

जस्टिस विक्रम अग्रवाल ने चंडीगढ़ प्रशासन को किश्वर की याचिका में लगाए गए आरोपों और दावों पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट ने पक्षकारों से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि किश्वर की FIR रद्द कराने की याचिका सुनवाई योग्य किस आधार पर है।

कोर्ट ने इस संबंध में एक समन्वय पीठ के कुलदीप सिंह बनाम पंजाब राज्य एवं अन्य मामले में दिए गए फैसले का संदर्भ लिया।

कोर्ट ने विशेष रूप से यह पहलू उठाया कि किश्वर की अग्रिम जमानत याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी है।

मामले में FIR एक वकील की शिकायत पर दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित किया जा रहा था, जिसमें भ्रामक दावा किया जा रहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक महिला से चेहरे की मालिश करा रहे हैं।

किश्वर की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने हाईकोर्ट को बताया कि वीडियो सबसे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' के कुछ यूजर्स द्वारा प्रसारित किया गया।

उनका कहना है कि किश्वर ने केवल ऐसे ही एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी थी और अपनी पोस्ट में न तो किसी व्यक्ति का नाम लिया और न ही किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का कोई उल्लेख किया।

सिब्बल ने बताया कि बाद में जुबैर मोहम्मद नाम के एक अन्य उपयोगकर्ता ने दावा किया कि किश्वर की पोस्ट से यह संकेत मिलता है कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।

इसके जवाब में किश्वर ने तत्काल स्पष्ट किया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति प्रधानमंत्री होने की संभावना नहीं है।

किश्वर के वकील ने अदालत को बताया कि इसके बाद वीडियो को कई अन्य यूजर्स ने भी साझा किया और कई लोगों ने किश्वर के इस रुख का समर्थन किया कि उन्होंने कहीं भी यह नहीं कहा था कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है।

सिब्बल ने दलील दी कि FIR में लगाए गए सभी आरोपों को सही मान भी लिया जाए तब भी किश्वर के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता।

उन्होंने FIR में लगाई गई विभिन्न धाराओं का हवाला देते हुए कहा कि अधिकतम आरोप मानहानि के दायरे में आ सकते हैं और मानहानि संज्ञेय अपराध नहीं है।

चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से पेश सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि किश्वर की अग्रिम जमानत याचिका 29 मई 2026 को एक समन्वय पीठ द्वारा खारिज की जा चुकी है।

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 अगस्त की तारीख तय की।

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