पंजाब सरकार ने पत्रकार रत्तनदीप ढालीवाल की याचिका का किया विरोध, हाईकोर्ट में कहा- समय से पहले दायर की गई याचिका
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में पत्रकार और यूट्यूबर रत्तनदीप सिंह ढालीवाल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने उसका विरोध करते हुए कहा कि यह याचिका समय से पहले दायर की गई और सुनवाई योग्य नहीं है।
मामले की सुनवाई जस्टिस राजेश भारद्वाज की पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान पंजाब के एडवोकेट जरनल मनींदरजीत सिंह बेदी ने अदालत को बताया कि पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता को अपने दावों के समर्थन में शपथपत्र दाखिल करने के लिए कहा गया।
हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि शपथपत्र दाखिल किया जा रहा है, लेकिन उसकी प्रति एडवोकेट जरनल ऑफिस को उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद मामले की सुनवाई 2 जुलाई तक स्थगित कर दी गई।
रत्तनदीप सिंह ढालीवाल अपने ऑनलाइन मंचों रत्तनदीप सिंह ढालीवाल और टॉक विद रत्तन के माध्यम से कार्यक्रम प्रसारित करते हैं।
बता दें यह विवाद मई 2026 में प्रसारित उनके एक पॉडकास्ट से जुड़ा है जिसमें उन्होंने 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों को लेकर चर्चा करते हुए कहा था कि लगभग 32 मौजूदा विधायकों को पार्टी आगामी चुनाव में उम्मीदवार नहीं बना सकती।
इस टिप्पणी के बाद आम आदमी पार्टी के कई विधायकों ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायतें दर्ज कराईं, जिसके आधार पर पंजाब के विभिन्न जिलों की पुलिस ने उन्हें नोटिस जारी किए।
याचिका में ढालीवाल ने अपने पॉडकास्ट से संबंधित सभी शिकायतों पर कार्रवाई पर रोक लगाने तथा विभिन्न जांचों और समन को चुनौती दी।
सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी पूछा कि क्या याचिकाकर्ता वही व्यक्ति हैं जिनके मामले में हाईकोर्ट की किसी अन्य पीठ ने पहले कार्यवाही पर रोक लगाई थी। इस पर एडवोकेट जरनल ने स्पष्ट किया कि वर्तमान मामला पूरी तरह अलग तथ्यों और परिस्थितियों से संबंधित है, इसलिए याचिकाकर्ता पूर्व आदेश का लाभ नहीं ले सकते।
अदालत ने इस दलील को रिकॉर्ड पर लिया और राज्य सरकार के इस पक्ष से सहमति जताई।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत से मौखिक रूप से यह आश्वासन देने का आग्रह किया गया कि उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
इसका विरोध करते हुए एडवोकेट जरनल ने कहा कि याचिका स्वयं ही समय से पहले दायर की गई है और सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि फिलहाल याचिकाकर्ता को केवल शिकायतों के संबंध में उपस्थित होने के लिए कहा गया तथा पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई कर रही है।
एडवोकेट ने अदालत से कहा,
“इस स्तर पर किसी प्रकार की सुरक्षा प्रदान करने का कोई आधार नहीं बनता।”
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जांच के दौरान नोटिस या समन जारी किया जाना अपने आप में हाइकोर्ट के रिट अधिकार क्षेत्र का सहारा लेने का पर्याप्त कारण नहीं हो सकता।
मामले में अब अगली सुनवाई 2 जुलाई को होगी, जब हाईकोर्ट याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दों पर आगे विचार करेगा।