'स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं एक इलाके से दूसरे इलाके में अलग नहीं हो सकतीं': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने मोबाइल टावर लगाने की अनुमति रद्द करने का फ़ैसला पलटा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि किसी खास इलाके के निवासियों की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को राज्य के बाकी हिस्सों के निवासियों से अलग नहीं माना जा सकता, और न ही यह मोबाइल टावर लगाने की अनुमति को चुनिंदा तरीके से रद्द करने का कोई उचित आधार हो सकता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब राज्य भर में ऐसे ही अन्य इलाकों में भी इसी तरह के टावर लगे हुए हैं तो इस तरह का तर्क साफ़ तौर पर बेबुनियाद है।
जस्टिस जगमोहन बंसल 'सरल मोबाइल प्रोजेक्ट सर्विसेज़ प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में फ़रीदाबाद के डिप्टी कमिश्नर के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके तहत 07.01.2025 को मोबाइल टावर लगाने के लिए दी गई अनुमति को 'रेजिडेंट्स वेलफ़ेयर एसोसिएशन' द्वारा उठाई गई आपत्तियों के बाद, "जनहित" का हवाला देते हुए रद्द कर दिया गया।
अनुमति रद्द करने का यह फ़ैसला HSVP द्वारा जारी एक पत्र पर आधारित था, जिसमें कहा गया था कि इलाके के निवासी टावर लगाने का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें इससे स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचने का डर है, खासकर बुज़ुर्गों के लिए। प्रतिवादियों ने दलील दी कि इन आपत्तियों और व्यापक जनहित को देखते हुए, डिप्टी कमिश्नर के पास अनुमति रद्द करने का अधिकार था।
कोर्ट ने रिकॉर्ड की जांच की और पाया कि याचिकाकर्ता ने लागू नीति के अनुसार ही अनुमति के लिए आवेदन किया था, और उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही अनुमति दी गई। कोर्ट ने यह भी पाया कि 'टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट, 2023' के तहत याचिकाकर्ता को "सुविधा प्रदाता" (Facility Provider), HSVP को "सार्वजनिक संस्था" (Public Entity), और संबंधित ज़मीन को "सार्वजनिक संपत्ति" (Public Property) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के औचित्य पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि राज्य भर में यहां तक कि पार्कों और घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों में भी मोबाइल टावर लगाए गए। कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि किसी एक इलाके के निवासियों के स्वास्थ्य को दूसरों के स्वास्थ्य से अलग नज़रिए से नहीं देखा जा सकता।
कोर्ट ने कहा:
“राज्य भर में HSVP या नगर निगम के स्वामित्व और प्रबंधन वाले पार्कों में भी मोबाइल टावर लगाए गए... किसी भी खास इलाके के निवासियों के स्वास्थ्य की ज़रूरत या सुरक्षा, पूरे राज्य के निवासियों से अलग नहीं हो सकती। सभी निवासी समान हैं, चाहे वे किसी शहर के किसी खास सेक्टर में रहते हों या कहीं और।”
कोर्ट ने 'टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट, 2023' की धारा 16 की भी जाँच की, जिसका हवाला प्रतिवादियों ने दिया था। कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि यह प्रावधान केवल दूरसंचार ढांचा (Telecommunication Infrastructure) स्थापित होने के बाद ही लागू होता है। इसका दायरा केवल नेटवर्क को हटाने, किसी दूसरी जगह ले जाने या उसमें बदलाव करने तक ही सीमित है। इसमें यह स्पष्ट किया गया कि यह प्रावधान पहले से दी गई अनुमति को रद्द करने का अधिकार नहीं देता है, विशेष रूप से ऐसे मामलों में जहाँ इंस्टॉलेशन अभी तक पूरा नहीं हुआ।
तदनुसार, हाईकोर्ट ने रिट याचिका स्वीकार की और मोबाइल टावर के इंस्टॉलेशन की अनुमति रद्द करने वाला विवादित आदेश रद्द कर दिया।
Case Title: Saral Mobile Project Services Pvt. Ltd. v. State of Haryana & Ors. [CWP-22231-2025]