Gurugram Demolitions: हाईकोर्ट ने अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की इजाज़त दी, कहा - सही प्रक्रिया का पालन ज़रूरी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को गुरुग्राम में उन अतिक्रमणों को हटाने की इजाज़त दी, जो नगर निगम कानूनों का उल्लंघन करते पाए गए। साथ ही कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि ऐसी कार्रवाई में सही कानूनी प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।
गुरुग्राम के निवासियों की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट में मौखिक रूप से यह बात उठाई और गुरुग्राम में "स्टिल्ट प्लस फोर" इमारतों को निशाना बनाकर चल रहे तोड़फोड़ अभियान पर प्रकाश डाला।
हाईकोर्ट ने अप्रैल में "स्टिल्ट प्लस फोर" नीति पर अंतरिम रोक लगाई थी। इस नीति के तहत रिहायशी प्लॉट पर पार्किंग लेवल (स्टिल्ट) के ऊपर चार अलग-अलग मंज़िलें बनाने की इजाज़त दी जाती है, जिसका मकसद शहरी इलाकों में घरों की उपलब्धता बढ़ाना है। यह देखते हुए कि "राज्य सरकार ने बुनियादी ढांचे की ज़मीनी हकीकत को नज़रअंदाज़ करते हुए सार्वजनिक सुरक्षा के बजाय राजस्व को ज़्यादा अहमियत दी," हाईकोर्ट ने इस नीति पर रोक लगाई थी।
इसके बाद हरियाणा सरकार के अधिकारियों ने 16 अप्रैल, 2026 को निर्देश जारी किया। उन्होंने कोर्ट के आदेश की यह व्याख्या की कि इसके तहत कई रिहायशी सेक्टरों में बाउंड्री वॉल, रैंप और हरे-भरे इलाकों को तुरंत गिराने की इजाज़त मिल गई। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने सिर्फ़ नीति से जुड़ी अधिसूचना के अमल पर रोक लगाई थी, न कि किसी तरह की तोड़फोड़ या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का निर्देश दिया था।
चीफ़ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी ने सोमवार को कहा,
"हम राज्य के अधिकारियों को यह इजाज़त देते हैं कि वे कानून की सही प्रक्रिया का पालन करते हुए सभी अतिक्रमणों को हटाएं और नगर निगम कानूनों के उल्लंघनों पर कार्रवाई करें।"
गुरुग्राम के सेक्टर 31 के निवासियों की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कोर्ट को बताया कि अधिकारी तोड़फोड़ को सही ठहराने के लिए उस आदेश का हवाला दे रहे हैं, जिसके तहत कोर्ट ने नीति पर रोक लगाई थी। उन्होंने आगे कहा कि अलग-अलग सेक्टरों में तोड़फोड़ शुरू हो गई है और पेड़ भी उखाड़ दिए गए।
राज्य सरकार की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि उनकी नीति का मकसद यह था कि लोग अपने वाहनों को अपनी ही बाउंड्री के अंदर पार्क कर सकें। हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि लोग अभी भी सड़कों पर ही पार्किंग कर रहे हैं।
चीफ़ जस्टिस ने याचिकाकर्ता की तरफ देखते हुए कहा,
"मुझे लगता है कि आप इस बात से वाकिफ़ हैं कि मॉनसून के दौरान गुरुग्राम में क्या हालात हो जाते हैं... ऐसे में कुछ कड़े कदम उठाना बेहद ज़रूरी है।"
कोर्ट ने यह भी साफ़ किया कि "स्टिल्ट प्लस फोर" नीति पर रोक लगाने वाला जो अंतरिम आदेश जारी किया गया, वह सिर्फ़ गुरुग्राम ज़िले के लिए है और भविष्य में लागू होने वाला (प्रोस्पेक्टिव) आदेश है। अधिकारियों को अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति देते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि किसी भी तोड़-फोड़ से पहले पूर्व सूचना दी जाए।
याचिकाकर्ताओं से अपनी दलीलें एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी करने को कहते हुए मामले की सुनवाई स्थगित की गई।
Title: Sunil Singh v. State of Haryana and ors.