वकील बेशर्मी से अदालतों का काम रोक रहे, दबाव में नहीं झुकेगी व्यवस्था: वकीलों की हड़ताल पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

Update: 2026-07-27 10:06 GMT

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कानूनी सहायता रक्षा अधिवक्ता (LADC) योजना के विरोध में वकीलों की हड़ताल पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि योजना के दुरुपयोग को लेकर कोई वास्तविक शिकायत है तो उस पर विचार किया जा सकता है लेकिन अदालतों का कामकाज ठप करना किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

एक्टिंग चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्र और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ यह टिप्पणी जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि वकीलों की लगातार हड़ताल के कारण पूरे पंजाब में वादकारियों को न्याय तक पहुंच से वंचित होना पड़ रहा है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा,

"हम किसी भी हालत में दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि अनुचित मांगों को अनुचित तरीके से मनवाया जाए।"

अदालत ने आगे कहा,

"उन्हें लगा कि यदि अधिक दबाव बनाया जाएगा तो व्यवस्था झुक जाएगी। पिछले 27 दिनों से पूरे पंजाब में न्यायिक उपचार की उपलब्धता लगभग ठप है। हम इसे हल्के में नहीं लेंगे। जो भी उचित होगा वह करेंगे।"

इससे पहले हाईकोर्ट ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, बार काउंसिल के सदस्यों और सीनियर वकीलों की दलीलें सुनने के बाद उम्मीद जताई कि मामला न्यायिक हस्तक्षेप के बिना आपसी सहमति से सुलझ जाएगा।

यह जनहित याचिका हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील अरविंद सेठ ने दायर की है। याचिका में कहा गया कि LADC योजना के विरोध में विभिन्न बार एसोसिएशनों द्वारा की जा रही हड़ताल के कारण पंजाब के जिला अदालतों का कामकाज गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।

याचिका के अनुसार राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ने आर्थिक रूप से कमजोर और पात्र लोगों को संस्थागत व्यवस्था के तहत कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कानूनी सहायता रक्षा अधिवक्ता (LADC) योजना लागू की थी। हालांकि, पंजाब की कई बार एसोसिएशनों ने इस योजना का विरोध करते हुए दावा किया कि इससे पहले से लागू पैनल वकील व्यवस्था के तहत कार्यरत वकीलों के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।

याचिका में कहा गया कि इसी विरोध के चलते कई बार एसोसिएशनों ने प्रस्ताव पारित कर अनिश्चितकालीन 'काम बंद' हड़ताल शुरू की, जिसके कारण जिला अदालतों में मामलों की सुनवाई लगातार टल रही है और वादकारियों को न्याय मिलने में गंभीर बाधा उत्पन्न हो रही है।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि कानून पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वकीलों को न तो हड़ताल करने का कानूनी अधिकार है और न ही अदालतों का बहिष्कार करने का मौलिक अधिकार। अदालतों तक लोगों की पहुंच कानून के शासन का एक मूल आधार है।

इन्हीं दलीलों के आधार पर याचिका में पंजाब के सभी जिला अदालतों का कामकाज सुचारु रूप से संचालित कराने और न्यायिक कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा रोकने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की गई।

मामले की अगली सुनवाई दोपहर बाद होगी।

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