पंजाब सरकार की उस याचिका पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार देर रात व्हाट्सएप के जरिए सुनवाई की, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) में छापेमारी के बाद वरिष्ठ नौकरशाहों और अधिकारियों को हिरासत में लिए जाने का आरोप लगाया गया।

करीब रात 10:42 बजे कैंप कार्यालय से WhatsApp वीडियो कॉल के जरिए सुनवाई हुई। इसके लिए हाईकोर्ट के एक सीनियर सहायक के मोबाइल फोन की मदद ली गई।

सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट ने आरोप लगाया कि ED ने IAS अधिकारियों और GMADA के अधिकारियों को हिरासत में लिया। उन्होंने अदालत के समक्ष यह सवाल भी उठाया कि क्या संविधान का अनुच्छेद 21 राज्य के नागरिकों को प्राप्त संवैधानिक अधिकारों की गारंटी नहीं देता, जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक स्वयं राज्य के अभिन्न अंग हैं।

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ED को नोटिस जारी किया, जिसका जवाब आज दाखिल किया जाना है।

इसी बीच, बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर हाईकोर्ट ने वारंट अधिकारी नियुक्त किया। अदालत ने GMADA परिसर में महिला अधिकारियों के संबंध में भी उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वारंट अधिकारी 24 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे तक मामले की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट पेश करेगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि कोई महिला अधिकारी अभी भी परिसर में रोकी गई पाई जाती है तो उसे उसकी सुविधा के स्थान पर भेजा जाए या, यदि उचित समझा जाए, तो उसका बयान दर्ज करने के बाद तत्काल रिहा किया जाए।

अदालत ने GMADA परिसर में वारंट अधिकारी की मौजूदगी तक वहां भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।

चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से पुलिस महानिदेशक, चंडीगढ़ को अदालत के आदेश के पालन के लिए पर्याप्त सुरक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

मामले में अब ED के जवाब और वारंट अधिकारी की स्थिति रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।

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