'तलाशी अभियान समाप्त हुआ, कथित बंदियों को रिहा किया गया': पंजाब ने ED छापे के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका वापस ली
पंजाब राज्य ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) के मुख्यालय में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तलाशी पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अपनी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका वापस ले ली, तलाशी समाप्त होने के बाद और जिन अधिकारियों पर आरोप लगाया गया था कि उन्हें परिसर में अवैध रूप से कैद किया गया था, उन्हें मुक्त कर दिया गया।
जस्टिस संजय वशिष्ठ,
"बदली हुई स्थिति/परिस्थितियों और बाद की घटनाओं का सामना करते हुए, क्योंकि तलाश भी पूरी हो चुकी है और कथित बंदियों को पहले ही मुक्त कर दिया गया, सीनियर एडवोकेट विक्रम चौधरी, एडिशनल एडवोकेट जनरल श्री फेरी सोफत की सहायता से वर्तमान याचिका को वापस लेने की मांग करते हैं। हालांकि, वह कानून के अनुसार, उचित मंच के समक्ष सभी मुद्दों को उठाकर उपाय का लाभ उठाने की स्वतंत्रता देने की प्रार्थना करते हैं।"
कोर्ट ने याचिका को इस छूट के साथ वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज किया। यह माना गया कि एडिशनल सॉलिसिटर जनरल द्वारा उठाए गए राज्य के अधिकार क्षेत्र सहित सभी प्रासंगिक मुद्दे "यदि कभी आवश्यक हो" निर्णय के लिए खुले रहेंगे। राज्य को मामले में नियुक्त वारंट अधिकारी की फीस के रूप में ₹55,000 का भुगतान करने का निर्देश दिया गया।
देर रात की सुनवाई में नियुक्त वारंट अधिकारी द्वारा रिपोर्ट किए जाने के कुछ घंटों बाद यह वापसी हुई कि अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उन्हें "परिसर में अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया गया" और उन पर किसी भी कागज पर हस्ताक्षर करने या कुछ भी स्वीकार करने के लिए दबाव नहीं डाला गया।
राज्य ने अपने गृह विभाग के अवर सचिव के माध्यम से कार्रवाई करते हुए आरोप लगाया कि ED का जालंधर जोनल कार्यालय धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) की धारा 16 और 17 के तहत पुडा भवन, सेक्टर 62, मोहाली में गमाडा मुख्यालय में तलाशी, सर्वेक्षण और जब्ती कर रहा था। इसमें कहा गया कि ऑपरेशन 22.09.2026 को दोपहर के आसपास शुरू हुआ।
राज्य ने आरोप लगाया कि विकास गर्ग, आईएएस, प्रमुख सचिव, आवास और शहरी विकास विभाग, पंजाब, संदीप ऋषि, आईएएस, मुख्य प्रशासक, गमाडा, अमरेंद्र सिंह मल्ही और राकेश पोपली, अतिरिक्त मुख्य प्रशासक, गमाडा सहित अधिकारियों को तब से ED की हिरासत में रखा गया।
राज्य ने अधिकारियों की तत्काल रिहाई और एक वारंट अधिकारी की नियुक्ति की मांग की। इसने PMLA प्राधिकरणों को रद्द करने और परिसर को सील करने और जब्त किए गए रिकॉर्ड और उपकरणों को वापस करने की भी मांग की और आगे यह घोषणा करने की मांग की कि पीएमएलए की धारा 16 और 17 किसी राज्य विभाग या वैधानिक प्राधिकरण के परिसर को सील करने की कोई शक्ति नहीं देती है।
इसमें शामिल ED अधिकारियों के खिलाफ PMLA की धारा 62 के तहत आपराधिक कार्रवाई और अनुच्छेद 21 के उल्लंघन के लिए मुआवजे की भी मांग की गई।
देर रात सुनवाई
कोर्ट ने 23.09.2026 को रात लगभग 10:42 बजे अपने कैंप कार्यालय में व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर याचिका पर सुनवाई की।
राज्य की ओर से सीनियर एडवोकेट विक्रम चौधरी ने प्रस्तुत किया कि छापेमारी दो दिनों तक रात भर जारी रही और अधिकारियों को जाने या घर जाने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि परिसर की सुरक्षा के लिए सैकड़ों सीआरपीएफ जवानों को तैनात किया गया।
उन्होंने तर्क दिया कि कार्रवाई मनमानी है, इससे "लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर आघात" होगा। साथ ही अनुच्छेद 21 के तहत अधिकारियों के अधिकारों का उल्लंघन होगा। उन्होंने TASMAC बनाम प्रवर्तन निदेशालय और तमिलनाडु राज्य बनाम प्रवर्तन निदेशालय में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर भरोसा किया।
Case Title: State of Punjab v. Union of India and Others