पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने NDPS मामले में ट्रक मालिक की दूसरी अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा कि कोई मुक़दमेबाज़ सिर्फ़ नया वकील रखकर कोर्ट में अपने पिछले वकील द्वारा दिए गए बयान से मुकर नहीं सकता, और वकील या कानूनी रणनीति बदलना हालात में बदलाव नहीं माना जा सकता।

जस्टिस आलोक जैन ने कहा कि ऐसा करने की इजाज़त देने से "नई मुसीबतें खड़ी हो सकती हैं" और कोर्ट के सामने बार (वकीलों) के सदस्यों द्वारा दिए गए बयानों की "पवित्रता और विश्वसनीयता गंभीर रूप से कम हो सकती है"।

आगे कहा गया,

"न्यायिक कार्यवाही को ऐसी प्रक्रिया नहीं बनाया जा सकता, जिसमें कोई पक्ष फ़ायदेमंद होने पर वकील के बयान को स्वीकार कर ले और नतीजे असुविधाजनक होने पर उससे मुकर जाए।"

कोर्ट ने कहा कि यह याचिका ₹1,00,000 का भारी जुर्माना लगाने के लिए उपयुक्त मामला है, लेकिन याचिकाकर्ता के वकील के अनुरोध पर जुर्माना नहीं लगाया गया।

याचिकाकर्ता रवि कुमार ने NDPS Act की धारा 15(c) के तहत दर्ज FIR में अग्रिम ज़मानत मांगी थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, याचिकाकर्ता के ट्रक के सह-आरोपी ड्राइवर से 1,033 किलोग्राम 970 ग्राम डोडा/चूरा पोस्ट बरामद किया गया।

उनकी पहली अग्रिम ज़मानत याचिका 01.09.2026 को वापस लेने के आधार पर खारिज कर दी गई। उस आदेश में दर्ज है कि मामले के गुण-दोष पर "जोरदार" बहस हुई। जब कोर्ट राहत देने के पक्ष में नहीं है तो वकील ने याचिका वापस लेने का अनुरोध किया और कहा कि उन्हें निर्देश मिले थे कि याचिकाकर्ता ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर करने को तैयार है। कोर्ट ने उन्हें एक हफ़्ते के भीतर सरेंडर करने की इजाज़त दी और निर्देश दिया कि उसके बाद दायर किसी भी नियमित ज़मानत आवेदन पर एक हफ़्ते के भीतर फ़ैसला किया जाए।

याचिकाकर्ता ने सरेंडर नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने एक अलग वकील के ज़रिए यह याचिका दायर की।

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उन्होंने कभी भी अपने पिछले वकील को सरेंडर के बारे में बयान देने का निर्देश नहीं दिया और मामले के गुण-दोष पर अतिरिक्त तर्क दिए। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि उनसे कोई बरामदगी नहीं होनी है।

राज्य ने याचिका का विरोध किया और याचिकाकर्ता के कॉल डिटेल रिकॉर्ड और WhatsApp बातचीत की ओर इशारा किया, जिनसे बरामदगी से ठीक पहले बार-बार संपर्क का पता चलता है। साथ ही उस टावर लोकेशन की ओर भी इशारा किया, जहां कथित तौर पर प्रतिबंधित सामान लोड किया गया। कोर्ट ने देखा कि पहली याचिका को शुरुआत में ही वापस नहीं लिया गया। राज्य ने अपना जवाब दाखिल किया और मामले पर विस्तार से बहस हुई थी। सरेंडर का बयान भी स्वेच्छा से दिया गया, न कि कोर्ट के कहने पर।

कोर्ट को तब से कोई खास बदलाव नहीं दिखा। एकमात्र अंतर नए वकील और कुछ अतिरिक्त दलीलें थीं, जो कोर्ट को पिछली याचिका में राज्य के जवाब का मुकाबला करने की कोशिश लगीं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को "न्यायिक प्रक्रिया के साथ लुका-छिपी का खेल खेलने की इजाजत नहीं दी जा सकती"।

कोर्ट ने माना कि कोई पक्षकार पिछली दलीलों या तर्कों में सुधार करके उसी राहत पर पुनर्विचार की मांग नहीं कर सकता। कोई ऐसी दलील जो पहली याचिका के फैसले के समय उपलब्ध थी, लेकिन जिस पर बहस नहीं की गई या ठीक से बहस नहीं की गई, उसे परिस्थितियों में बदलाव नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत जरूरी है कि पिछले आदेश के बाद परिस्थितियों में बदलाव हो, "न कि सिर्फ वकील बदलना और अलग तरह की दलील देने की रणनीति अपनाना"।

कोर्ट ने कहा,

"कोर्ट के सामने किसी पक्षकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए विधिवत नियुक्त और अधिकृत वकील उस पक्षकार की ओर से बोलता है। न्यायिक कार्यवाही के दौरान वकील द्वारा दिए गए बयानों से पक्षकार को केवल अपने कहने भर से मुकरने की इजाजत नहीं दी जा सकती, खासकर तब जब कोर्ट ने उस बयान के आधार पर ही पिछला आदेश पारित किया हो।"

कोर्ट ने ट्रक से बरामद कमर्शियल मात्रा (जिसका मालिक याचिकाकर्ता है, जैसा कि उसने खुद माना है) और उसके ट्रांसपोर्ट बिजनेस में शामिल होने पर ध्यान दिया। राज्य के CDR, WhatsApp और टावर लोकेशन के सबूतों के साथ मिलाकर देखने पर कोर्ट ने कहा कि ये परिस्थितियां याचिकाकर्ता की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाती हैं, जिनकी गहन जांच की जरूरत है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अदालतें ड्रग तस्करी की समस्या को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। कमर्शियल वाहनों के दुरुपयोग से असली ट्रांसपोर्टरों पर भी शक पैदा होता है, जिन्हें फिर कड़ी जांच का सामना करना पड़ सकता है। कोर्ट ने माना कि यह दलील कि याचिकाकर्ता से कोई बरामदगी नहीं होनी थी, अपने आप में "अग्रिम जमानत का पक्का अधिकार" नहीं बनाती।

याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने माना कि यह याचिका कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की कोशिश थी।

Case Title: Ravi Kumar v. State of Haryana

अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Tags: