अनिवार्य टेंडर शर्तों में ढील नहीं दी जा सकती: पटना हाईकोर्ट ने बोलीदाता की योग्यता रद्द की

Update: 2026-04-09 11:50 GMT

पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि टेंडर प्रक्रिया में निर्धारित अनिवार्य शर्तों को नजरअंदाज या शिथिल नहीं किया जा सकता। अदालत ने आवश्यक दस्तावेज जमा न करने वाले एक बोलीदाता को तकनीकी रूप से योग्य घोषित करने और उसे एल-1 घोषित करने का फैसला रद्द किया।

जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेन्द्र सिंह की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें ग्रामीण कार्य विभाग के एक टेंडर से जुड़े विवाद को चुनौती दी गई।

याचिकाकर्ता ने आपत्ति जताई कि निजी पक्ष ने टेंडर की अनिवार्य शर्तों के तहत जरूरी “पेमेंट सर्टिफिकेट” जमा नहीं किया। फिर भी उसे तकनीकी रूप से योग्य घोषित कर दिया गया।

अदालत ने कहा कि टेंडर की शर्तें पूरी प्रक्रिया की आधारशिला होती हैं और इनका पालन सभी पक्षों के लिए अनिवार्य है।

हाईकोर्ट ने कहा,

“अनिवार्य शर्तों की पवित्रता को कम नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसा करने से पारदर्शिता, निष्पक्षता और समानता प्रभावित होती है।”

रिकॉर्ड के अवलोकन में अदालत ने पाया कि संबंधित बोलीदाता ने जरूरी पेमेंट सर्टिफिकेट जमा नहीं किया और केवल अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए थे, जो इस कमी को पूरा नहीं कर सकते थे।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि टेंडर में जमा किए गए दस्तावेजों के आधार पर ही योग्यता तय की जा सकती है और बाद में दस्तावेज जोड़कर कमी पूरी करना स्वीकार्य नहीं है।

अदालत ने कहा कि यह कमी कोई साधारण त्रुटि नहीं, बल्कि एक गंभीर और मूलभूत खामी है, जो बोलीदाता की पात्रता को सीधे प्रभावित करती है।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने संबंधित बोलीदाता को तकनीकी रूप से योग्य घोषित करने और उसे एल-1 घोषित करने के फैसले को मनमाना और नियमों के खिलाफ बताते हुए रद्द किया।

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