मेघालय हाईकोर्ट ने कहा कि सहमति के आधार पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत POCSO केस रद्द किया जा सकता है, भले ही 'बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम, 2012' (POCSO Act) एक विशेष कानून हो।

हालांकि, कोर्ट ने साफ़ किया कि ऐसी शक्ति का इस्तेमाल खास मामलों में पूरी सावधानी और सोच-समझकर किया जाना चाहिए। इसके लिए हर मामले के तथ्यों और हालात पर ध्यान देना होगा, जैसे कि पक्षों की उम्र, क्या पीड़ित की सहमति जानकारी के साथ और बिना किसी दबाव के दी गई, और क्या पीड़ित और आरोपी की शादी हो चुकी है, उनका कोई बच्चा है या वे स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे हैं।

चीफ जस्टिस रेवती मोहिते डेरे ने कहा:

"सहमति से BNSS की धारा 528 के तहत POCSO केस रद्द करना जायज़ है, भले ही यह एक विशेष कानून हो... हालांकि, इस अधिकार का इस्तेमाल खास मामलों में पूरी सावधानी और सोच-समझकर किया जाना चाहिए।"

Case Name: Shri Sooki Rymbai v/s State of Meghalaya

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