वे अपने 6 साल के बेटे के साथ रह रहे हैं: मेघालय हाईकोर्ट ने पीड़िता की सहमति को आधार मानते हुए रद्द किया POCSO मामला
मेघालय हाईकोर्ट ने 25 वर्षीय व्यक्ति के खिलाफ दर्ज POCSO मामला रद्द किया। कोर्ट ने पाया कि 22 वर्षीय पीड़िता ने अपनी मर्जी और पूरी जानकारी के साथ मामला रद्द करने के लिए सहमति दी। वह अपने 6 साल के बेटे के साथ उस व्यक्ति के साथ स्वेच्छा से रह रही है।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे विशेष मामलों में, जहां किशोरों के बीच आपसी सहमति से संबंध बने हों, जिसके परिणामस्वरूप शादी या साथ रहना (सहजीवन) हुआ हो और बच्चे भी हों, वहां 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) की धारा 528 के तहत कार्यवाही रद्द की जा सकती है। शर्त यह है कि पीड़िता की सहमति असली हो और उसे पूरी जानकारी हो।
जस्टिस रेवती मोहिते डेरे ने टिप्पणी की:
"यह तथ्य कि याचिकाकर्ता 2023 से अपने बेटे के साथ एक साथ रह रहे हैं। ऐसे में याचिका को स्वीकार करने में कोई बाधा नहीं है।"
याचिकाकर्ताओं ने मेघालय हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 2020 में 'ख्लिहरियात महिला पुलिस स्टेशन' में POCSO Act के तहत दर्ज FIR और 'स्पेशल जज (POCSO), ख्लिहरियात' के समक्ष चल रही कार्यवाही को रद्द करने की मांग की।
उन्होंने बताया कि जब पीड़िता 10वीं कक्षा में पढ़ रही थी, तब वे आपसी सहमति से रिश्ते में आए। इस रिश्ते से उनका एक 6 साल का बेटा है। उन्होंने आगे बताया कि वे अपने परिवारों की सहमति से पति-पत्नी की तरह एक साथ रह रहे हैं और पीड़िता को इस मामले की कार्यवाही रद्द किए जाने से कोई आपत्ति नहीं है।
कोर्ट ने माना कि विशेष मामलों में यदि पीड़िता की सहमति असली है, उसे पूरी जानकारी है और उस पर कोई दबाव नहीं डाला गया है तो BNSS की धारा 528 के तहत POCSO कार्यवाही रद्द की जा सकती।
'हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमिटी' और पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने पाया कि पीड़िता अपनी मर्जी से आरोपी के साथ रह रही है और उसे मामला रद्द किए जाने से कोई आपत्ति नहीं है।
इसके अनुसार, कोर्ट ने FIR और लंबित POCSO कार्यवाही रद्द की। अदालत ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे पीड़िता और उसके छह साल के बेटे को सरकारी लाभ उपलब्ध कराएं, और उसकी पढ़ाई फिर से शुरू करने में मदद के लिए एक सहायक व्यक्ति नियुक्त करें।
Case Title : Dakhutmeki Shylla v/s The State of Meghalaya