सिर्फ़ घरेलू हिंसा का केस पेंडिंग होने की वजह से पति को विदेश यात्रा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पति या पत्नी को सिर्फ़ इसलिए विदेश यात्रा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि उनके बीच कोई विवाद पेंडिंग है।
जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायण ने एक पति को राहत दी, जिसे पत्नी द्वारा शुरू की गई घरेलू हिंसा की कार्यवाही पेंडिंग होने के कारण अपना पासपोर्ट वापस करने के लिए कहा गया। कोर्ट ने माना कि घरेलू हिंसा की कार्यवाही तब तक सिविल प्रकृति की होती है जब तक कि 'महिलाओं का घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005' की धारा 31 के तहत कोई आदेश पारित न हो जाए।
इस अधिनियम की धारा 31 संरक्षण आदेश के उल्लंघन के लिए सज़ा से संबंधित है। इस धारा के अनुसार, कोर्ट द्वारा जारी संरक्षण आदेश का कोई भी उल्लंघन सज़ा-योग्य अपराध है, जिसके लिए एक साल तक की जेल या 20,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
इस प्रकार, यह देखते हुए कि मौजूदा मामले में कार्यवाही आपराधिक नहीं थी, कोर्ट ने आदेश रद्द करने का मन बनाया।
कोर्ट ने कहा,
"DVC कार्यवाही, जब तक कि वह 'महिलाओं का घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005' की धारा 31 के चरण तक नहीं पहुँचती, तब तक सिविल प्रकृति की होती है। यह आपराधिक कार्यवाही नहीं है। पति-पत्नी के बीच विवाद के कारण पति या पत्नी को विदेश यात्रा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।"
कोर्ट उस पति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे अपना पासपोर्ट वापस करने के लिए कहा गया, क्योंकि पत्नी ने उसके खिलाफ DV अधिनियम के तहत कार्यवाही शुरू की थी।
पति ने बताया कि दंपति के बीच कोयंबटूर में फैमिली कोर्ट में एक केस पेंडिंग है। इसी बीच पत्नी ने घरेलू हिंसा की कार्यवाही शुरू की थी। पति ने कहा कि पासपोर्ट कार्यालय ने पेंडिंग घरेलू हिंसा की कार्यवाही को आपराधिक कार्यवाही माना और उसे पासपोर्ट सरेंडर करने के लिए कहा। उसने कोर्ट को बताया कि वह विदेश में पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप करना चाहता है और अगर पासपोर्ट वापस करना पड़ा तो उसे गंभीर नुकसान होगा।
कोर्ट ने गौर किया कि पासपोर्ट अथॉरिटी को पासपोर्ट रद्द करने की शक्ति इसलिए दी गई ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पासपोर्ट धारक कोर्ट में पेश हो और आपराधिक कार्यवाही का सामना करे। मौजूदा मामले में कोर्ट ने पाया कि कार्यवाही आपराधिक प्रकृति की नहीं थी। इस प्रकार, अदालत ने पासपोर्ट अधिकारियों द्वारा पारित आदेश रद्द किया।
Case Title: R Ramaswamy v The Regional Passport Office and Another