तमिलनाडु में अब डिजिटल जारी होंगे ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी, हाईकोर्ट ने खारिज की चुनौती
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC) को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने की नई योजना पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार किया। हालांकि हाईकोर्ट ने योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार और परिवहन आयुक्त को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
चीफ जस्टिस एसए धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने शुक्रवार 11 सितंबर को मामले की सुनवाई की। याचिका में परिवहन आयुक्त की ओर से जारी उस संचार को चुनौती दी गई, जिसके जरिए ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया। अदालत ने राज्य सरकार से याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा लेकिन अंतरिम राहत के तौर पर प्रस्ताव पर रोक लगाने से इनकार किया।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने 2 सितंबर को डिजिटल ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी उपलब्ध कराने की सुविधा शुरू करने की घोषणा की थी। प्रस्ताव के मुताबिक ड्राइविंग टेस्ट पास करने वाले व्यक्ति को उसी दिन डिजिटल ड्राइविंग लाइसेंस डाउनलोड करने की सुविधा मिलेगी जबकि वाहन के रजिस्ट्रेशन के दिन ही डिजिटल आरसी उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार का कहना है कि इससे लाइसेंस और आरसी हासिल करने में होने वाली देरी खत्म होगी तथा प्रशासन में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। यह व्यवस्था 15 सितंबर से शुरू करने का प्रस्ताव है।
बेंगलुरु स्थित कंपनी फोर्स आइडेंटिफिकेशन प्राइवेट लिमिटेड ने इस योजना के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी ने तमिलनाडु सूचना प्रौद्योगिकी (इलेक्ट्रॉनिक सेवा वितरण) नियम, 2016 के नियम 5(3)(a) की वैधानिकता को भी चुनौती दी।
याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क है कि इस नियम को ऐसा अधिकार देने वाला प्रावधान नहीं माना जा सकता, जिसके आधार पर कोई विभाग महज कार्यकारी आदेश जारी करके किसी वैधानिक सार्वजनिक सेवा के गैर-इलेक्ट्रॉनिक माध्यम को पूरी तरह समाप्त कर दे। कंपनी का कहना है कि किसी सेवा को केवल डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने के लिए संबंधित सेवा के संबंध में निर्धारित अधिसूचना और उन्हीं नियमों में तय सुरक्षा उपायों का पालन जरूरी है।
याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि तमिलनाडु के सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी नियमों का इस्तेमाल मोटर वाहन अधिनियम और केंद्रीय मोटर वाहन नियमों का विकल्प बनाकर नहीं किया जा सकता। कंपनी के मुताबिक उसने पहले भी निगम की ओर से जारी उस संचार को अदालत में चुनौती दी, जिसके जरिए ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी जारी करने तथा उन्हें डाक या अन्य मौजूदा माध्यम से भेजने की मैनुअल व्यवस्था बंद करने का प्रस्ताव रखा गया था।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उस मामले में निविदा प्रक्रिया पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी थी। इसी मामले के लंबित रहने के दौरान मौजूदा व्यवस्था को समाप्त करने संबंधी नया संचार जारी किया गया। कंपनी का आरोप है कि यह कदम उचित वैधानिक अधिकार के बिना उठाया गया।
याचिका में कहा गया कि कार्यकारी संचार के जरिए मौजूदा वैधानिक व्यवस्था में बदलाव करना संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g), 162 और 166 की आवश्यकताओं के विपरीत है। कंपनी ने इसे कार्यपालिका की ऐसी शक्ति का इस्तेमाल बताया, जिसके जरिए बिना निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए मौजूदा वैधानिक व्यवस्था को बदलने का प्रयास किया गया।
हालांकि, याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि उसकी आपत्ति ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी के डिजिटल किए जाने को लेकर नहीं है। चुनौती केवल इस बात को लेकर है कि डिजिटल माध्यम को अनिवार्य और एकमात्र माध्यम बनाया जा रहा है तथा लाइसेंस और आरसी जारी करने की मौजूदा व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त किया जा रहा है।
फिलहाल हाईकोर्ट ने सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई। राज्य सरकार और परिवहन आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। मामले में आगे की सुनवाई सरकार के जवाब के बाद होगी।