Twisha Sharma Dowry Death Case: सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम ज़मानत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा हाईकोर्ट

Update: 2026-05-25 10:21 GMT

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (25 मई) को त्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह से कथित दहेज हत्या मामले में उन्हें दी गई अग्रिम ज़मानत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जवाब मांगा।

जस्टिस देवनारायण मिश्रा की सिंगल जज बेंच ने पीड़ित के माता-पिता की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा (जिनके साथ एडवोकेट अनुराग श्रीवास्तव भी हैं) की दलीलें सुनीं। लूथरा ने याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई की मांग की।

लूथरा ने कोर्ट को बताया कि दो संबंधित मामले सूचीबद्ध हैं- एक राज्य सरकार द्वारा दायर और दूसरा पीड़ित के माता-पिता द्वारा। दोनों ही गिरिबाला सिंह (जो एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश भी हैं) को दी गई अग्रिम ज़मानत को चुनौती दे रहे हैं।

गिरिबाला सिंह की ओर से पेश हुईं सीनियर एडवोकेट नित्या रामकृष्णन ने दलील दी कि राज्य सरकार की याचिका में ही "गलत बयान" शामिल हैं। उन्होंने अनुरोध किया कि मामले को जल्द से जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

हालांकि, लूथरा ने ज़ोर देकर कहा कि पीड़ित के माता-पिता के पास ज़मानत रद्द करने की राज्य सरकार की याचिका का समर्थन करने का एक स्वतंत्र अधिकार है।

राज्य सरकार की ओर से पेश हुए एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि अग्रिम ज़मानत रद्द करने की मांग वाली राज्य सरकार की याचिका के संबंध में गिरिबाला सिंह को पहले ही नोटिस भेजा जा चुका है।

पीठ ने संज्ञान लिया कि माता-पिता ने भी राज्य सरकार द्वारा उठाए गए मुद्दों के अलावा "अतिरिक्त दलीलें" दायर कीं। साथ ही टिप्पणी की कि सिंह को उन बयानों का जवाब देने का अवसर दिया जाना आवश्यक है।

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा,

"माता-पिता ने अतिरिक्त दलीलें दायर की हैं; हमें प्रतिवादियों को इन दलीलों का जवाब देने का मौका देना होगा।"

साथ ही कोर्ट ने सुझाव दिया कि माता-पिता वैकल्पिक रूप से खुद को केवल राज्य सरकार की याचिका का समर्थन करने तक ही सीमित रख सकते हैं।

इसके बाद कोर्ट ने गिरिबाला सिंह को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया, ताकि वे माता-पिता की याचिका का जवाब दे सकें।

जब सिंह के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा तो लूथरा ने मामले की तात्कालिकता पर ज़ोर दिया।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी जल्द सुनवाई की तारीख तय करने पर ज़ोर दिया। साथ ही यह तर्क दिया कि सिंह ने मात्र एक दिन के भीतर ही ज़मानत हासिल कर ली थी।

मेहता ने कहा,

"इसमें संस्थागत पक्षपात था... जब वे ज़मानत के लिए अर्ज़ी दे सकते हैं और उन्हें एक ही दिन में ज़मानत मिल जाती है। हम जल्द और तेज़ी से सुनवाई की गुज़ारिश करते हैं, जैसा कि सेशंस कोर्ट ने किया था।"

आखिरकार, मामले की सुनवाई 27 मई (बुधवार) के लिए तय की गई।

Case Title: State v Giribala Singh, MCRC/24475/2026, Navnidhi Sharma v State MCRC/24405/2026

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