सरकारी स्कूलों में स्टाफ की कमी: एमपी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से शिक्षकों की खाली पदों का डेटा रिकॉर्ड पर रखने को कहा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार (20 जनवरी) को राज्य सरकार को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकारी स्कूलों में खाली पड़े टीचिंग पदों की संख्या बताते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इस याचिका में दावा किया गया था कि लगभग 600 सरकारी स्कूलों में स्टाफ की कमी है या कोई टीचिंग स्टाफ नहीं है।
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सर्राफ की डिवीजन बेंच ने कहा,
"राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए कुछ और समय मांगा। अनुरोध पर मामले को 24.02.2026 को लिस्ट किया जाए। प्रतिवादी अपने हलफनामे में राज्य में सरकारी स्कूलों की संख्या और उन स्कूलों में खाली पदों की स्थिति के बारे में भी बताएंगे।"
10 दिसंबर, 2025 को दायर PIL में दावा किया गया कि लगभग 499 स्कूलों में स्टाफ की कमी है। 102 स्कूलों में कोई शिक्षक उपलब्ध नहीं है। याचिकाकर्ता ने इन शिक्षकों की पोस्टिंग और ट्रांसफर के संबंध में भी शिकायतें उठाईं।
याचिकाकर्ता के अनुसार, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को संविधान के अनुच्छेद 21-A के तहत गारंटीकृत शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है। यह भी कहा गया कि 15 साल पहले मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) लागू होने के बावजूद, राज्य सरकार पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति करने में विफल रही है।
याचिका में इस बात पर जोर दिया गया कि RTE Act की धारा 8(d) सरकार पर निर्धारित मानदंडों के अनुसार शिक्षकों की समय पर नियुक्ति सुनिश्चित करने का दायित्व डालती है। हालांकि, इस कर्तव्य को निभाने में राज्य की विफलता के कारण एक्ट की धारा 25 के तहत अनिवार्य छात्र-शिक्षक अनुपात खत्म हो गया, जिससे हजारों बच्चों, खासकर सामाजिक या आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों से आने वाले बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार एक भ्रम बन गया।
इसलिए याचिका में सभी खाली पदों को तुरंत भरने और RTE Act की धारा 8(d) का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश मांगे गए।
हालांकि, बेंच ने याचिका के दायरे को यह देखते हुए सीमित कर दिया कि संबंधित शिक्षक ट्रांसफर या पोस्टिंग के मुद्दों से परेशान होने पर एक स्वतंत्र याचिका दायर कर सकते हैं। इसलिए बेंच ने याचिका के दायरे को स्कूलों में टीचिंग स्टाफ की कमी या अनुपलब्धता तक सीमित कर दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी, 2026 को तय की गई।
Case Title: Lok Singh v State [WP-38550-2025]