स्कूल परिसर में तंबाकू बेचने पर कर्मचारी की बर्खास्तगी बरकरार, हाइकोर्ट ने खारिज की याचिका
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने ग्वालियर स्थित सिंधिया स्कूल के एक चपरासी की सेवा समाप्ति को सही ठहराते हुए उसकी याचिका खारिज की।
कर्मचारी पर स्कूल परिसर के भीतर तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी और गुटखा बेचने का आरोप है।
जस्टिस आनंद सिंह बहारावत की पीठ ने कहा,
“याचिकाकर्ता की सेवाएं गंभीर आरोपों के कारण समाप्त की गईं। राज्य और केंद्र सरकार ने स्कूल परिसरों के निर्धारित क्षेत्रों में ऐसे पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश और नियम बनाए हैं।”
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता ने दलील दी कि 28 वर्ष की सेवा के बाद उसे आरोप पत्र दिया गया लेकिन गवाहों और दस्तावेजों की सूची उपलब्ध नहीं कराई गई।
उसने यह भी कहा कि विभागीय जांच के दौरान उसे सुनवाई का उचित अवसर नहीं दिया गया और कुछ कागजों पर उसके हस्ताक्षर बिना सामग्री बताए करा लिए गए। याची ने स्वयं को अशिक्षित बताते हुए कहा कि जांच के दौरान दर्ज बयानों को उसे समझाया नहीं गया।
इससे पहले उसने लेबर कोर्ट में याचिका दायर की थी, जहां उसकी मांग खारिज कर दी गई और सेवा समाप्ति को सही माना गया।
प्रतिवादी पक्ष ने हाइकोर्ट में कहा कि पूरी जांच स्कूल के नियमों और स्थायी आदेशों के अनुसार की गई। आरोप पत्र के साथ दस्तावेजों की प्रतियां देना आवश्यक नहीं था। यह भी बताया गया कि लेबर कोर्ट ने माना कि संबंधित दस्तावेज याची को उपलब्ध कराए गए और उसने अपने दोष स्वीकार करने से जुड़े तथ्यों को छिपाया।
प्रतिवादी पक्ष ने यह भी कहा कि नियोक्ता के जूनियर वकील को जांच अधिकारी नियुक्त करना नियमों के अनुरूप था।
हाइकोर्ट ने अभिलेखों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि विभागीय जांच नियमों और स्थायी आदेशों के अनुरूप की गई।
अदालत ने कहा कि मामले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है और याचिका को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया।