OBC आरक्षण कोटा में बढ़ोतरी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 27 अप्रैल से सुनवाई शुरू करेगा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

Update: 2026-04-02 12:46 GMT

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि 2019 के उस अध्यादेश से जुड़े सभी मामलों को, जिसमें OBC आरक्षण कोटा बढ़ाया गया, 27 अप्रैल, 2026 से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

यह विवाद राज्य सरकार द्वारा मार्च 2019 में पारित एक अध्यादेश से शुरू हुआ, जिसमें पोस्टग्रेजुएट मेडिकल दाखिलों में OBC आरक्षण को बढ़ाया गया। इससे पहले, OBC श्रेणी के लिए आरक्षण 14% था, जिसे बढ़ाकर 27% कर दिया गया।

इस बढ़ोतरी के परिणामस्वरूप, कुल आरक्षण 50% की उस सीमा से अधिक हो गया, जो सुप्रीम कोर्ट ने 'इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ' मामले में तय की थी।

इस अध्यादेश को सामान्य श्रेणी के कई उम्मीदवारों ने चुनौती दी थी, जिन्होंने NEET PG 2019 परीक्षा उत्तीर्ण की थी। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि नीति में इस अचानक बदलाव से उच्च मेरिट होने के बावजूद, पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीट पाने की उनकी संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने आगे यह भी तर्क दिया कि यह अध्यादेश संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत प्राप्त संवैधानिक गारंटियों का उल्लंघन करता है; ये अनुच्छेद कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित करते हैं और सार्वजनिक रोजगार तथा शिक्षा में आरक्षण को विनियमित करते हैं।

पिछली कार्यवाही

मार्च, 2019 में हाईकोर्ट ने प्रभावी रूप से इस अध्यादेश के कार्यान्वयन पर रोक लगाई थी। इसके बाद सितंबर में कोर्ट ने राज्य सरकार की उक्त याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें इस रोक को हटाने की मांग की गई थी।

तत्पश्चात, फरवरी 2021 में हाईकोर्ट ने दलीलों (Pleadings) को पूरा करने का निर्देश दिया और अंतरिम राहत को जारी रखा। कोर्ट ने 'अशिता दुबे' के मुख्य मामले के तहत कई अन्य याचिकाओं को भी एक साथ जोड़ दिया।

इसके बाद फरवरी 2026 में ये मामले सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां से उन्हें वापस हाई कोर्ट भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि अध्यादेश की वैधता और आवश्यकता की जांच करने के लिए हाईकोर्ट सबसे उपयुक्त मंच है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस मामले का निपटारा शीघ्रता से, यानी तीन महीने के भीतर किया जाए।

हालिया सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा कि क्या सभी संबंधित मामलों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया गया।

इसके बाद खंडपीठ को सूचित किया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च, 2026 को एक और आदेश पारित किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के समक्ष स्थानांतरित की गई दो याचिकाओं को वापस हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया। दीपक कुमार पटेल बनाम मध्य प्रदेश राज्य (WP - 24247/2022) और हरिशंकर बरोदिया बनाम मध्य प्रदेश राज्य (WP - 24847/2022) शीर्षक वाली रिट याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध की जानी हैं।

अतः, खंडपीठ ने निर्देश दिया:

"हमें सूचित किया गया कि 20 मार्च 2026 के एक बाद के आदेश द्वारा इन याचिकाओं को हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने वाले आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने वापस ले लिया, और अब इन्हें सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध किया जाना है। रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह इन मामलों को इस बैच से हटा दे और उक्त याचिकाओं के संबंध में सुप्रीम कोर्ट से आगे के आदेशों की प्रतीक्षा करे।"

शेष मामलों के लिए हाईकोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सभी याचिकाएं सूचीबद्ध हों ताकि 27 अप्रैल 2026 से सुनवाई शुरू की जा सके।

Case Title: Ashita Dubey v State of Madhya Pradesh WP - 5901/2019 (O)

Tags:    

Similar News