प्रसूति वार्ड में महिलाओं का वीडियो बनाने के आरोपी को जमानत, हाईकोर्ट ने कहा- राज्य पक्ष कोई ठोस सामग्री पेश नहीं कर सका

Update: 2026-06-15 13:29 GMT

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रसूति एवं लेबर वार्ड में भर्ती महिलाओं का वीडियो बनाने के आरोपी एक व्यक्ति को जमानत दी। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य पक्ष मामले की डायरी से आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सामग्री प्रस्तुत नहीं कर सका।

जस्टिस द्वारका धीश बंसल की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य की ओर से ऐसी कोई सामग्री नहीं दिखाई गई, जिससे आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि हो सके।

अदालत ने कहा कि मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना आरोपी को जमानत दिए जाने का अनुरोध स्वीकार किया जाता है और निचली अदालत का आदेश निरस्त किया जाता है।

आरोपी ने स्पेशल कोर्ट द्वारा उसकी जमानत याचिका खारिज किए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

विशेष न्यायालय ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून से जुड़े मामले में उसकी जमानत अर्जी नामंजूर कर दी थी।

सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से दलील दी गई कि उसे 5 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ आपराधिक धमकी, लोक सेवक को कर्तव्य पालन से रोकने के लिए हमला या बल प्रयोग, अपराधी को शरण देने, स्वेच्छा से चोट पहुंचाने तथा हमला या आपराधिक बल प्रयोग सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। साथ ही अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग की महिला की लज्जा भंग करने से संबंधित प्रावधान भी लगाए गए।

बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी ने अस्पताल में कथित अनियमितताओं को उजागर करने के उद्देश्य से डॉक्टरों और कर्मचारियों के वीडियो बनाए। यह भी कहा गया कि वह 5 मई 2026 से न्यायिक हिरासत में है।

वहीं राज्य पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ पहले से चार आपराधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि, सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष मामले की डायरी से आरोपी के खिलाफ कोई ठोस आपत्तिजनक सामग्री प्रस्तुत नहीं कर सका।

मामले की डायरी का अवलोकन करने और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने आरोपों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए आरोपी को जमानत देने का आदेश पारित किया और विशेष न्यायालय के 11 मई 2026 का आदेश रद्द किया।

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