EWS अभ्यर्थी 'आयु सीमा में छूट का दावा' अधिकार के रूप में नहीं कर सकते, नियमों में प्रावधान जरूरी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के अभ्यर्थी केवल संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर आयु सीमा में छूट का दावा अधिकार के रूप में नहीं कर सकते। यदि संबंधित भर्ती नियमों या सरकारी नीति में ऐसी छूट का प्रावधान नहीं है तो अदालत उसे प्रदान करने का निर्देश नहीं दे सकती।
जस्टिस प्रणय वर्मा और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी पद की भर्ती में आयु सीमा में छूट की मांग करने वाले अभ्यर्थी की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
अदालत ने कहा कि आयु सीमा में छूट और उससे जुड़ी अन्य रियायतें राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार दी जाती हैं। संविधान में मौजूद सक्षमकारी प्रावधान अपने आप किसी व्यक्ति को ऐसी छूट प्राप्त करने का पूर्ण अधिकार नहीं देते।
मामले में अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि भर्ती विज्ञापन में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट दी गई थी लेकिन EWS वर्ग के उम्मीदवारों को यह लाभ नहीं दिया गया। इससे समानता के सिद्धांत का उल्लंघन होता है और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को आरक्षण देने के लिए किए गए 103वें संविधान संशोधन के उद्देश्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
याचिकाकर्ता पेशे से वकील है और EWS वर्ग से संबंधित है। उसने बताया कि निर्धारित कट-ऑफ तिथि 1 जनवरी 2027 को उसकी आयु 43 वर्ष थी जबकि विज्ञापन में अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष तय की गई। आयु छूट का लाभ न मिलने के कारण वह ऑनलाइन आवेदन भी नहीं कर सका।
अपीलकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि वर्ष 2021 के बाद लगभग पांच वर्षों तक इस पद के लिए कोई भर्ती परीक्षा आयोजित नहीं की गई। ऐसे में प्रशासनिक देरी का खामियाजा अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना चाहिए।
वहीं राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि आरक्षण और आयु सीमा में छूट जैसे लाभ केवल तब दिए जा सकते हैं, जब उनका स्पष्ट प्रावधान किसी नियम या सरकारी नीति में हो। अदालत कार्यपालिका को ऐसे लाभ देने का निर्देश नहीं दे सकती जो मौजूदा भर्ती नियमों में शामिल ही नहीं हैं।
राज्य के तर्कों से सहमत होते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि नीति संबंधी मामलों में अदालत अपीलीय प्राधिकरण की तरह हस्तक्षेप नहीं करती, जब तक कि संबंधित नीति मनमानी, भेदभावपूर्ण या असंवैधानिक न हो।
खंडपीठ ने अपने पूर्व के एक निर्णय का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया कि आरक्षण और उससे संबंधित रियायतें लागू वैधानिक व्यवस्था के अधीन होती हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 15(6) और 16(6) EWS वर्ग को आरक्षण देने की अनुमति देने वाले सक्षमकारी प्रावधान हैं लेकिन वे अपने आप आयु सीमा में छूट पाने का लागू करने योग्य अधिकार उत्पन्न नहीं करते।
हाईकोर्ट ने कहा कि किन वर्गों को आयु सीमा में छूट दी जानी है, यह तय करना राज्य की विधायी और नीतिगत शक्ति के दायरे में आता है। इसी आधार पर अदालत ने अपील खारिज की।