फीस में मनमानी बढ़ोतरी और किताबों की सप्लाई में गड़बड़ी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूल अधिकारियों के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार

Update: 2026-04-23 04:50 GMT

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर के उन प्राइवेट स्कूलों के अधिकारियों के खिलाफ FIR रद्द करने से इनकार किया, जिन पर फीस में भारी बढ़ोतरी करने और अभिभावकों को चुनिंदा विक्रेताओं से नकली या डुप्लीकेट ISBN वाली किताबें ज़्यादा कीमतों पर खरीदने के लिए मजबूर करने का आरोप है।

जस्टिस बीपी शर्मा की बेंच ने यह टिप्पणी की:

"इस तरह का बर्ताव, जब किताबों और स्टेशनरी पर मिलने वाले भारी मुनाफे और सप्लाई के खास तरीके के साथ मिलाकर देखा जाता है तो यह एक सोची-समझी साज़िश की ओर इशारा करता है। इसका मकसद अभिभावकों को गैर-ज़रूरी चीज़ें खरीदने के लिए मजबूर करना है, जिससे उन्हें गलत तरीके से नुकसान होता है और आरोपियों को गैर-कानूनी फायदा मिलता है। इसलिए यह पहलू कथित आपराधिक साज़िश का एक अहम हिस्सा है और इसे सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं माना जा सकता।"

यह मामला ज़िला कलेक्टर द्वारा शुरू की गई एक जांच से जुड़ा है। जांच उन शिकायतों के आधार पर शुरू की गई कि कई प्राइवेट स्कूलों ने फीस तय सीमा से ज़्यादा बढ़ाई थी और स्टूडेंट्स को चुनिंदा विक्रेताओं से किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया, जिससे उन्हें गैर-कानूनी फायदा हुआ।

जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि स्कूलों ने ऐसी किताबें तय की थीं जिन पर कथित तौर पर डुप्लीकेट और गलत ISBN छपे थे। साथ ही उन्होंने इन किताबों की उपलब्धता को कुछ चुनिंदा किताब विक्रेताओं तक ही सीमित किया, जिससे सप्लाई का एक बंद सिस्टम बन गया।

इन नतीजों के आधार पर अधिकारियों ने स्कूल के प्रिंसिपल, मैनेजमेंट के सदस्यों, किताब विक्रेताओं और प्रकाशकों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके बाद गिरफ्तारियां हुईं और फिर ज़मानत की प्रक्रिया शुरू हुई।

Case Title: Atul Anupam Abraham v State of Madhya Pradesh [2026:MPHC-JBP:26548]

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