अवैध खनन मामले में जज को प्रभावित करने का आरोप: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने BJP MLA के खिलाफ शुरू की आपराधिक अवमानना की कार्रवाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार (02 अप्रैल) को अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र से BJP विधायक संजय पाठक के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करे। विधायक पर अवैध खनन से जुड़े एक मामले में मौजूदा जज से अनुचित तरीके से संपर्क करने का आरोप है।
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने निर्देश दिया,
"रजिस्ट्री मिस्टर संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना याचिका दर्ज करे और इस आपराधिक अवमानना याचिका को 06.04.2026 को कोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करे।"
यह घटनाक्रम एक व्हिसलब्लोअर (भेद खोलने वाले) आशुतोष दीक्षित द्वारा दायर याचिका के संदर्भ में सामने आया। इस याचिका में दीक्षित ने कोर्ट से यह निर्देश देने की मांग की थी कि वह रिट याचिका नंबर 28456/2025 में एक जज से अनुचित तरीके से संपर्क करने और उन्हें प्रभावित करने की पाठक द्वारा की गई कोशिश का न्यायिक संज्ञान ले।
याचिकाकर्ता सितंबर 2025 की एक घटना का जिक्र कर रहा था, जब पाठक ने जस्टिस विशाल मिश्रा से संपर्क करने की कोशिश की थी ताकि उनके समक्ष लंबित अवैध खनन मामले पर चर्चा की जा सके।
इस संपर्क की कोशिश के बाद जस्टिस मिश्रा ने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया था।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 440 करोड़ रुपये के अवैध लौह अयस्क खनन के इस मामले में कथित GST चोरी के लिए 80 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। जिन कंपनियों पर संदेह है—निर्मला मिनरल्स, आनंद माइनिंग और पैसिफिक एक्सपोर्ट—उनका कथित तौर पर BJP विधायक से संबंध है।
वर्तमान याचिका में खंडपीठ ने यह टिप्पणी की कि पाठक का आचरण प्रथम दृष्टया (Prima Facie) आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है।
तदनुसार, इस याचिका का निपटारा करते हुए रजिस्ट्री को यह निर्देश दिया गया कि वह स्वतः संज्ञान लेते हुए एक आपराधिक अवमानना याचिका दर्ज करे।
Case Title: Ashutosh Dixit v State of Madhya Pradesh [WP-4699-2026]