मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गाँव के एकमात्र स्कूल को बंद करने से इनकार किया, कमियों को दूर करने के लिए रचनात्मक उपाय करने को कहा

Update: 2026-06-29 14:29 GMT

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उमरिया की ग्राम पंचायत को निर्देश दिया कि वह उस इलाके में चल रहे एकमात्र स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर करने के लिए सक्रिय कदम उठाए, जिसमें एक प्रस्ताव पारित करना भी शामिल है। [2026 LiveLaw (MP) 241]

एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें निजी स्कूल की मान्यता रद्द करने की मांग की गई। याचिका में कहा गया कि स्कूल में बैठने की व्यवस्था, शौचालय, पीने के पानी की सुविधा, ब्लैकबोर्ड, सुरक्षा उपाय और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

खंडपीठ ने निजी स्कूल की मान्यता रद्द करने से इनकार करते हुए कहा:

"चूंकि यह ग्राम पंचायत में चल रहा एकमात्र स्कूल है और कोई वैकल्पिक सरकारी स्कूल उपलब्ध नहीं है, इसलिए इस संस्थान को बंद करने से स्थानीय बच्चों का शैक्षणिक भविष्य सीधे तौर पर खतरे में पड़ जाएगा। इसलिए निजी स्कूल को बंद करने या उसकी मान्यता रद्द करने के बजाय, सभी संबंधित पक्षों को जनहित में बताई गई कमियों को व्यवस्थित रूप से दूर करने के लिए रचनात्मक और समन्वित प्रयास करने चाहिए। हाई कोर्ट को जनहित याचिका पर विचार करते समय रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।"

इसलिए खंडपीठ ने निर्देश दिया:

"याचिकाकर्ता कोटारी ग्राम पंचायत (जनपद पंचायत मानपुर) के सरपंच और उप-सरपंच हैं। उनका यह सार्वजनिक कर्तव्य है कि वे शिक्षा को बढ़ावा दें और ग्रामीणों व उनके बच्चों के लिए बेहतर नागरिक सुविधाएं सुनिश्चित करें। ग्राम पंचायत को इस मामले को अपनी आम सभा की बैठक में उठाना चाहिए और एक प्रस्ताव पारित करना चाहिए, जिसमें यह बताया जाए कि स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय सहायता और सहयोग से इन कमियों को कैसे कम किया जा सकता है और दूर किया जा सकता है।"

यह याचिका ग्राम पंचायत के सदस्यों ने दायर की थी, जो खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं। उन्होंने उमरिया जिले के कोटारी गाँव में प्रतिवादी संख्या 8 द्वारा चलाए जा रहे निजी स्कूल, देवर्षि हाई स्कूल के खिलाफ यह याचिका दायर की थी।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उन्होंने सक्षम अधिकारी के समक्ष अपनी शिकायतें रखी थीं, जिसके बाद ब्लॉक शिक्षा अधिकारी द्वारा जांच की गई। याचिकाकर्ताओं ने आगे दावा किया कि जांच रिपोर्ट में स्कूल की इमारत की स्थिति असंतोषजनक और असुरक्षित पाई गई। तदनुसार, उचित कार्रवाई के लिए जिला शिक्षा अधिकारी को एक सिफारिश भेजी गई। याचिकाकर्ताओं ने एक स्पॉट इंस्पेक्शन रिपोर्ट का भी ज़िक्र किया, जिसमें स्कूल में टॉयलेट की सुविधाओं की कमी का पता चला, जिसके कारण छात्रों को खुले में शौच के लिए मजबूर होना पड़ता।

इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि स्कूल के प्रिंसिपल को कमियों के बारे में स्पष्टीकरण मांगने के लिए एक नोटिस जारी किया गया, लेकिन प्रिंसिपल की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को 2025 में उनके द्वारा दायर एक और PIL के बारे में भी जानकारी दी, जिसे सक्षम अधिकारियों के समक्ष लंबित अभ्यावेदन पर आगे बढ़ने की छूट के साथ खारिज कर दिया गया।

कोर्ट ने पाया कि उस इलाके में कोई अन्य सरकारी स्कूल नहीं चल रहा था, और वह प्राइवेट स्कूल ही एकमात्र उपलब्ध स्कूल था। साथ ही स्थानीय बच्चों के "शैक्षणिक भविष्य" पर ज़ोर देते हुए बेंच ने स्कूल को बंद करने से इनकार किया। इस प्रकार, उपर्युक्त निर्देश जारी करते हुए कोर्ट ने याचिका का निपटारा किया।

Case Title: Manggi Bai Kole v State of Madhya Pradesh, WP-43662-2025

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