बुजुर्ग माता-पिता को संपत्ति बेचने से यूं ही नहीं रोका जा सकता, बच्चों को पहले साबित करने होंगे अधिकार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि बच्चे मामूली आधार पर अदालत पहुंचकर अपने बुजुर्ग माता-पिता को संपत्ति का उपयोग करने या उसे बेचने से नहीं रोक सकते। अदालत ने कहा कि ऐसा करने से पहले बच्चों को यह प्रथम दृष्टया साबित करना होगा कि संपत्ति संयुक्त पारिवारिक संपत्ति है और उसमें उनका जन्मसिद्ध अधिकार मौजूद है।
जस्टिस विवेक जैन की सिंगल बेंच ने निचली अपीलीय अदालत के आदेश को सही ठहराते हुए पिता की चार में से दो संपत्तियों को संयुक्त पारिवारिक संपत्ति माना जबकि बाकी दो संपत्तियों पर पिता को रोकने वाला अंतरिम आदेश हटा दिया।
अदालत ने कहा,
“पिता को उनकी अपनी संतान के कहने पर संपत्ति के उपयोग से रोकने के लिए बच्चों को बहुत मजबूत प्रथम दृष्टया मामला प्रस्तुत करना होगा, जिससे परिवार में संयुक्त संपत्ति और जन्मसिद्ध अधिकार का अस्तित्व साबित हो सके।”
हाईकोर्ट ने आगे कहा,
“जरा-सी बात पर बच्चे अदालत पहुंचकर अपने बुजुर्ग माता-पिता को संपत्ति बेचने या उसका आनंद लेने से नहीं रोक सकते। ऐसा करना सीनियर सिटीजन्स के साथ अन्याय होगा और जीवन की अंतिम अवस्था में उनके बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित करना होगा।”
बता दें, यह मामला पारिवारिक बंटवारे के एक विवाद से जुड़ा था। जय कुमार केवट ने अपने पिता और अन्य भाई-बहनों के खिलाफ मुकदमा दायर कर दावा किया था कि पिता के नाम दर्ज कुछ पैतृक संपत्तियां वास्तव में संयुक्त पारिवारिक संपत्ति हैं जिनमें सभी बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है।
ट्रायल कोर्ट ने शुरुआत में चारों संपत्तियों को लेकर पिता पर रोक लगाई थी और उन्हें संपत्ति बेचने या हस्तांतरित करने से मना किया था। बाद में अपीलीय अदालत ने इस आदेश में संशोधन करते हुए केवल दो संपत्तियों पर रोक बरकरार रखी और बाकी दो संपत्तियों के संबंध में कहा कि उन्हें संयुक्त पारिवारिक संपत्ति साबित करने के पर्याप्त प्रथम दृष्टया साक्ष्य नहीं हैं।
हाईकोर्ट ने माना कि अपीलीय अदालत ने सही तौर पर यह ध्यान रखा कि पिता की उम्र 90 वर्ष है और ऐसे बुजुर्ग व्यक्ति को अपनी संपत्ति के उपयोग से अनावश्यक रूप से नहीं रोका जाना चाहिए।
अदालत ने कहा कि सीनियर सिटीजन्स को उनकी जीवन संध्या में संपत्ति के अधिकार से वंचित करना न्याय के मूल सिद्धांतों के विपरीत होगा।
सभी तथ्यों और संपत्तियों की स्थिति का परीक्षण करने के बाद हाईकोर्ट ने अपीलीय अदालत के फैसले को सही ठहराया और दोनों याचिकाएं खारिज कीं।