अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को अपनी पसंद का प्राचार्य चुनने का पूर्ण अधिकार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्यप्रदेश ने कहा है कि अल्पसंख्यक सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों (minority aided educational institutions) को अपने संस्थान का प्रमुख चुनने का संवैधानिक अधिकार है और इस अधिकार पर कोई भी प्रतिबंध संविधान के Article 30(1) का उल्लंघन होगा।
जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस आनंद सिंह बहारावत की खंडपीठ ने कहा कि यदि किसी अल्पसंख्यक संस्थान का प्रबंधन योग्य व्यक्ति को प्राचार्य या हेडमास्टर नियुक्त करने का फैसला करता है, तो अदालत उस निर्णय की उचितता या प्रक्रिया की जांच नहीं कर सकती।
मामला S.S.L. Jain P.G. College, विदिशा में प्राचार्य पद के प्रभार को लेकर विवाद से जुड़ा था। वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक डॉ. अर्चना जैन को प्राचार्य पद का प्रभार देने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश पर क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक ने उन्हें प्रभार सौंप दिया।
हालांकि बाद में कॉलेज की गवर्निंग बॉडी ने 28 जनवरी 2025 को प्रस्ताव पारित कर SK Upadhyay को प्राचार्य का प्रभार सौंप दिया। इसके खिलाफ डॉ. अर्चना जैन ने याचिका दायर की थी।
सिंगल जज ने मामले में क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक को नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया था। लेकिन खंडपीठ ने उस आदेश को रद्द करते हुए कहा कि अल्पसंख्यक संस्थानों को अपनी पसंद का योग्य व्यक्ति चुनने का पूर्ण अधिकार है, चाहे संस्थान सरकारी सहायता प्राप्त ही क्यों न हो।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 2021 के सरकारी सर्कुलर, जिसमें वरिष्ठतम शिक्षक को प्रभार देने की बात कही गई थी, अल्पसंख्यक संस्थानों पर लागू नहीं होंगे।
अंततः हाईकोर्ट ने सिंगल जज का आदेश निरस्त करते हुए एस.के. उपाध्याय को प्राचार्य का प्रभार देने के फैसले को बरकरार रखा।