बसों में एक ही दरवाजा यात्रियों की जान के लिए खतरा: हाईकोर्ट ने दो दरवाजे अनिवार्य करने का आदेश दिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यात्री सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य की सभी स्टेज कैरिज और टूरिस्ट बसों में अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार अनिवार्य करने का निर्देश दिया।
अदालत ने क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण को 45 दिनों के भीतर नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
जस्टिस विवेक जैन की पीठ ने कहा कि बसों में एक ही दरवाजा होना यात्रियों की सुरक्षा के साथ गंभीर समझौता है। खासकर आग या दुर्घटना की स्थिति में।
अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,
“यह अत्यंत खेदजनक स्थिति है कि अनेक वातानुकूलित और लक्जरी बसों में दो दरवाजे नहीं हैं। आग की घटनाओं में बड़ी संख्या में जान-माल का नुकसान होना सर्वविदित है। फिर भी नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया।”
अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए निर्देश दिया कि 5 जनवरी 2012 से पहले पंजीकृत बसों की भी जांच की जाए। यदि कोई बस मध्य प्रदेश मोटर वाहन नियम 1994 के नियम 164 का उल्लंघन करती पाई जाती है तो उसे 45 दिनों के भीतर नियमों का पालन करने तक संचालन से रोका जाए।
मामले में याचिकाकर्ता की बस का परमिट राज्य परिवहन अपीलीय अधिकरण द्वारा रद्द कर दिया गया, जिसे हाइकोर्ट ने सही ठहराया।
अदालत ने पाया कि बस नियम 77(1-ए) के तहत निर्धारित मानकों को भी पूरा नहीं कर रही थी जिसमें न्यूनतम सीट क्षमता 35+2 (ड्राइवर और कंडक्टर सहित) होना अनिवार्य है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हर बस में बाईं ओर दो दरवाजे एक प्रवेश और एक निकास के लिए और एक आपातकालीन दरवाजा होना जरूरी है। संबंधित बस में केवल एक ही प्रवेश-निकास द्वार था जो नियमों के विपरीत है।
पीठ ने कहा,
“व्यावसायिक लाभ के लिए सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। एक ही दरवाजा दुर्घटना या आग लगने की स्थिति में यात्रियों के जीवन के लिए गंभीर खतरा है।”
अदालत ने राज्य के सभी परिवहन प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि वे नियमों के उल्लंघन की जांच करें और दोषी बसों के संचालन पर रोक लगाएं।
मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई।