'कोल्डरिफ' कफ सिरप से बच्चों की मौत मामला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डॉक्टर व फार्मासिस्टों की जमानत याचिका खारिज की

Update: 2026-02-18 10:48 GMT

मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने मंगलवार (17 फरवरी) को डॉ. प्रवीण सोनी और अन्य फार्मासिस्टों की जमानत याचिकाएं खारिज की। इन पर आरोप है कि उन्होंने बच्चों को 'कोल्डरिफ' नामक कफ सिरप लिखकर और बेचकर 30 से अधिक बच्चों की मौत का कारण बने।

जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की पीठ ने कहा कि आवेदक एक बाल रोग विशेषज्ञ हैं और उन्हें 1998 में दिल्ली में डीईजी से दूषित कफ सिरप के कारण 33 बच्चों की मौत की घटना की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने उक्त सिरप लिखना जारी रखा।

अदालत के अनुसार, इसके परिणामस्वरूप 4-5 वर्ष से कम आयु के 26 से अधिक मासूम बच्चों की मृत्यु हुई।

अदालत की प्रमुख टिप्पणियां

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि आवेदक की सीनियर डॉक्टर प्रवीण खापेकर से बातचीत हुई, जिसमें 1998 की दिल्ली घटना का उल्लेख करते हुए डीईजी संदूषण की आशंका जताई गई। इसके बावजूद आरोपी डॉक्टर ने कथित रूप से वही कफ सिरप बच्चों को लिखना जारी रखा, जिससे व्यापक स्तर पर जनस्वास्थ्य को गंभीर नुकसान हुआ।

अभियोजन के अनुसार डॉक्टर ने 2 से 5 वर्ष आयु के बच्चों को कोल्डरिफ ब्रांड का कफ सिरप लिखा। लैब रिपोर्ट में पाया गया कि यह सिरप, जिसे श्रीसन फार्मास्युटिकल्स द्वारा निर्मित बताया गया, प्रतिबंधित पदार्थ डायएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) से युक्त था।

राज्य की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल ने दलील दी कि 18 दिसंबर, 2023 को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा जारी परिपत्र के तहत 4 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए इस प्रकार के फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन कफ सिरप पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद डॉक्टर ने दवा लिखी।

राज्य ने यह भी आरोप लगाया कि डॉक्टर की पत्नी ज्योति सोनी, जिनकी मेडिकल दुकान उनके क्लिनिक के पास थी, वहीं से यह सिरप बेचा जाता था। अदालत ने यह भी नोट किया कि डॉक्टर को उक्त सिरप लिखने पर कमीशन भी प्राप्त होता था।

अन्य आरोपियों को भी राहत नहीं

पीठ ने थोक विक्रेता राजेश कुमार सोनी, मेडिकल स्टोर संचालक ज्योति सोनी और अनिल कुमार मिश्रा, तथा वहां कार्यरत पंजीकृत फार्मासिस्ट सौरभ कुमार जैन और अशोक कुमार मिश्रा की जमानत याचिकाएं भी खारिज की।

अदालत ने कहा कि यह मामला बड़े पैमाने पर जनस्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला है और प्रथम दृष्टया आरोप अत्यंत गंभीर हैं, इसलिए जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले नवंबर, 2025 में हाईकोर्ट ने कोल्डरिफ कफ सिरप के एक वितरक की दुकान सील करने और ड्रग लाइसेंस रद्द करने के खिलाफ दायर अपील भी खारिज करते हुए इस प्रकरण को मेडिकल इतिहास का सबसे चौंकाने वाला मामला बताया था। वहीं अक्टूबर, 2025 में छिंदवाड़ा की अदालत ने भी डॉ. प्रवीण सोनी की जमानत याचिका खारिज की।

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