निजी IRCTC ID से टिकट बुक करना Section 143 के तहत अपराध नहीं, अधिकृत एजेंट को MP हाईकोर्ट से राहत
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि अधिकृत IRCTC ई-टिकटिंग एजेंट द्वारा अपने एजेंट ID के बजाय निजी IRCTC यूजर ID से रेलवे टिकट बुक करना, अपने आप में रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत आपराधिक अपराध नहीं है।
जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने अधिकृत एजेंट के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए कहा कि निजी ID के इस्तेमाल से एजेंसी की शर्तों का उल्लंघन हो सकता है और इसके लिए प्रशासनिक या संविदात्मक कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन इससे धारा 143 के तहत आपराधिक दायित्व नहीं बनता।
यह मामला सिंगरौली में साइबर कैफे चलाने वाले एक व्यक्ति से जुड़ा था, जो 2015 से अधिकृत IRCTC ई-टिकटिंग एजेंट था। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की कार्रवाई के दौरान पाया गया कि दो रेलवे टिकट उसके अधिकृत एजेंट ID के बजाय निजी IRCTC ID से बुक किए गए थे। इसके बाद उसके खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत चार्जशीट दाखिल की गई।
हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 143 का उद्देश्य बिना प्राधिकरण रेलवे टिकटों की खरीद और आपूर्ति का कारोबार करने वाले व्यक्तियों को दंडित करना है। इस मामले में याचिकाकर्ता स्वयं एक अधिकृत एजेंट था और चार्जशीट में यह आरोप नहीं था कि वह बिना प्राधिकरण टिकटों का कारोबार कर रहा था।
पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के Inspector RPF v. Mathew K. Cherian और J. Ramesh v. Union of India के फैसलों का भी हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि अधिकृत एजेंट द्वारा एजेंसी की शर्तों का उल्लंघन होने पर मामला प्रशासनिक या सिविल कार्रवाई का हो सकता है, धारा 143 के तहत आपराधिक अभियोजन का नहीं।
हाईकोर्ट ने ऐसे कृत्य के लिए आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग माना और याचिका स्वीकार करते हुए आरोपी के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।