दतिया किले की संपत्ति विवाद में हाईकोर्ट की अंतरिम रोक, जमीन बेचने और तीसरे पक्ष का अधिकार बनाने पर पाबंदी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दतिया किले से जुड़े संपत्ति विवाद में अंतरिम राहत देते हुए अगली सुनवाई तक विवादित जमीन को बेचने, हस्तांतरित करने या उस पर किसी तीसरे पक्ष का अधिकार बनाने पर रोक लगाई।
जस्टिस अमित सेठ की पीठ ने हेमलता सिंह और उनके बेटे की अपील पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया।
अपीलकर्ताओं ने ट्रायल कोर्ट के 24 मार्च 2026 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उनकी अस्थायी निषेधाज्ञा की मांग खारिज कर दी गई। मूल दीवानी मुकदमे में उन्होंने विवादित संपत्तियों पर स्वामित्व की घोषणा और स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की है। विवाद दतिया किला, सेंवढ़ा किला और पीली कोठी से जुड़ी संपत्तियों को लेकर है।
अपीलकर्ताओं का आरोप है कि मुकदमा दायर होने के बाद प्रतिवादियों ने विवादित संपत्तियों का निपटारा करना और उनकी प्रकृति में बदलाव करना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि यदि मुकदमे के लंबित रहने के दौरान संपत्ति को बेचा या उस पर किसी तरह का भार या तीसरे पक्ष का अधिकार बनाया गया तो आगे कई मुकदमेबाजी की स्थिति पैदा हो सकती है और अंतिम डिक्री प्रभावहीन होने का खतरा रहेगा।
हाईकोर्ट में दायर अपील में यह भी कहा गया कि समान पक्षकारों के बीच कृषि भूमि से जुड़े एक अन्य मुकदमे में पहले ही अंतरिम निषेधाज्ञा दी जा चुकी है। अपीलकर्ताओं के अनुसार वर्तमान विवाद गैर-कृषि संपत्तियों से जुड़ा है और संपत्ति को पैतृक संपदा बताया गया, इसलिए विवादित संपत्तियों की स्थिति बनाए रखने के लिए समान अंतरिम संरक्षण दिया जाना चाहिए।
अपीलकर्ताओं ने प्रतिवादियों के कथित पारिवारिक बंटवारे या समझौते के दावे पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि इस दावे के समर्थन में मूल दस्तावेज पेश नहीं किए गए। इसी तरह 7 जनवरी 1951 की कथित वसीयत की केवल छायाप्रति पर भरोसा किए जाने का भी विरोध किया गया। अपीलकर्ताओं के अनुसार मूल वसीयत न तो पेश की गई और न ही साबित की गई। उन्होंने राजस्व रिकॉर्ड का हवाला देते हुए दावा किया कि ये दस्तावेज प्रतिवादियों के कब्जे संबंधी दावे से मेल नहीं खाते।
अपील में किले के परिसर में कथित मारपीट और इस संबंध में दर्ज FIR का भी उल्लेख किया गया। हालांकि, हाईकोर्ट के 15 सितंबर के आदेश में इन आरोपों पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया।
अपीलकर्ताओं ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द करने के साथ प्रतिवादियों को विवादित संपत्तियों पर आगे निर्माण करने, धरोहर संरचनाओं की प्रकृति बदलने और तीसरे पक्ष के अधिकार बनाने से रोकने की मांग की।
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी संख्या 1(ए) की ओर से पेश वकील ने कैविएट के आधार पर उपस्थिति दर्ज कराते हुए संक्षिप्त जवाब दाखिल किया। हाईकोर्ट ने इस प्रतिवादी को नोटिस की तामील से छूट दे दी, जबकि अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। मामला छह सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होगा। तब तक विवादित जमीन के संबंध में बिक्री, हस्तांतरण या किसी तीसरे पक्ष का अधिकार बनाने पर रोक प्रभावी रहेगी।