मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया, जिसमें 9 जनवरी 2026 के सरकारी परिपत्र के बावजूद सार्वजनिक स्थानों पर कोनोकार्पस प्रजाति के पेड़ लगाए जाने का आरोप लगाया गया। यह प्रजाति स्थानीय नहीं है।

जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि सात कार्यदिवस के भीतर डाक खर्च जमा कराकर स्पीड पोस्ट के जरिए पावती सहित नोटिस भेजा जाए। मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश भी दिया गया।

एक वकील की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया कि केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने संबंधित प्रजाति के पेड़ों के पर्यावरणीय और पारिस्थितिक प्रभावों की जांच की थी। समिति ने इस प्रजाति का आगे पौधरोपण रोकने और इसके स्थान पर उपयुक्त स्थानीय प्रजातियों को बढ़ावा देने की सिफारिश की थी।

याचिका के अनुसार, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने 9 जनवरी 2026 को एक परिपत्र जारी कर नगरीय निकायों को कोनोकार्पस के पौधे लगाने से बचने का निर्देश दिया।

इसमें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के लोकसभा में दिए गए जवाब का भी उल्लेख किया गया, जिसमें सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इस प्रजाति का पौधरोपण तत्काल प्रभाव से रोकने की सलाह दिए जाने की बात कही गई।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि सरकारी परिपत्र के बावजूद सार्वजनिक स्थानों पर कोनोकार्पस के पेड़ लगाए जा रहे हैं।

याचिका में कहा गया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए बनाई गई नीति केवल सरकारी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जिस गतिविधि को रोकने का निर्णय लिया गया, उस पर जमीनी स्तर पर भी अमल होना चाहिए।

याचिका में यह भी दावा किया गया कि इस प्रजाति के परागकण संवेदनशील लोगों में एलर्जी और सांस लेने संबंधी परेशानी पैदा कर सकते हैं या उन्हें बढ़ा सकते हैं। इससे स्थानीय निवासियों में सांस से जुड़ी अन्य समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है।

याचिकाकर्ता ने बताया कि इस संबंध में 23 जुलाई 2026 को संबंधित अधिकारियों को विस्तृत प्रतिवेदन भेजा गया था, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

इसके बाद हाईकोर्ट का रुख किया गया। याचिका में मांग की गई है कि राज्य में कोनोकार्पस के पौधरोपण पर रोक से जुड़ी नीति का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए जाएं।

हाईकोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को निर्धारित है।

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