LPG संकट पर वीडियो डालने पर शिक्षक के निलंबन पर रोक, एमपी हाईकोर्ट ने कहा- बिना सोच-समझ के लिया गया फैसला

Update: 2026-03-27 11:19 GMT

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी प्राथमिक शिक्षक के निलंबन पर रोक लगाते हुए कहा कि यह आदेश बिना उचित विचार किए और जल्दबाजी में पारित किया गया प्रतीत होता है।

जस्टिस आशीष श्रोति की पीठ ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को निर्देश दिया कि वह पूरे मामले पर नए सिरे से विचार करें और तथ्यों के आधार पर निर्णय लें।

मामला उस शिक्षक से जुड़ा है, जिस पर आरोप है कि उसने 13 मार्च, 2026 को फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें एलपीजी गैस की कमी पर चर्चा की गई। प्रशासन का आरोप था कि इस वीडियो से समाज में अशांति फैल सकती है और विभाग की छवि को नुकसान पहुंचा।

हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वीडियो में कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं थी और उसमें केवल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण उत्पन्न गैस संकट पर चर्चा की गई।

याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि निलंबन का आदेश क्षेत्र के एक विधायक के दबाव में जारी किया गया। बताया गया कि वीडियो के बाद विधायक ने डीईओ को पत्र लिखा और उसके तुरंत बाद निलंबन आदेश जारी कर दिया गया।

अदालत ने टिप्पणी की,

“यह आदेश जल्दबाजी में और कथित रूप से निर्देशों के तहत पारित किया गया, इसलिए मामले पर पुनर्विचार आवश्यक है।”

पीठ ने स्पष्ट किया कि निलंबन एक अंतरिम कदम होता है, जिसका उद्देश्य जांच को निष्पक्ष रूप से पूरा करना होता है, न कि इसे सामान्य प्रक्रिया के रूप में अपनाया जाना चाहिए।

अदालत ने कहा,

“किसी कर्मचारी को केवल औपचारिकता के तौर पर निलंबित नहीं किया जा सकता। निलंबन का अधिकार और उसका उपयोग अलग-अलग बातें हैं। यदि आदेश मनमाना या बिना सोच-समझ के है तो न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है।”

हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि निलंबन आदेश में किसी जांच का उल्लेख नहीं था और इसे बिना उचित आधार के पारित किया गया।

इसी के साथ अदालत ने निलंबन पर रोक लगाते हुए डीईओ को निर्देश दिया कि वह पूरे मामले का स्वतंत्र रूप से पुनर्मूल्यांकन करें और उचित निर्णय लें।

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