निरस्त Foreigners Act के तहत अपराध दर्ज करना 'प्रथम दृष्टया अवैध': फॉर्म-C दाख़िल करने में देरी पर दर्ज FIR को MP हाईकोर्ट ने किया रद्द

Update: 2026-02-08 12:25 GMT

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक निजी मकान मालिक के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है, जिसमें उस पर किसी विदेशी नागरिक के ठहरने की जानकारी 24 घंटे के भीतर फॉर्म-C में न देने का आरोप लगाया गया था। न्यायालय ने कहा कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष यह स्पष्ट है कि Foreigners Act, 1946 के निरस्त हो जाने के बाद उसके तहत किसी प्रकार की आपराधिक कार्रवाई कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है, खासकर तब जब Immigration and Foreigners Act, 2025 लागू हो चुका है।

जस्टिस हिमांशु जोशी ने कहा कि 1 सितंबर 2025 से 1946 का अधिनियम निरस्त हो चुका है, ऐसे में न तो उस अधिनियम और न ही उसके अंतर्गत बनाए गए Registration of Foreigners Rules, 1992 को उसके बाद की किसी घटना पर लागू किया जा सकता है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी मूल (parent) अधिनियम के निरस्त होने के साथ-साथ उसके अंतर्गत बनी अधीनस्थ विधियां (subordinate legislation) भी स्वतः समाप्त हो जाती हैं, जब तक कि उन्हें स्पष्ट रूप से संरक्षित (saved) न किया गया हो। किसी भी प्रकार का दायित्व या दंडात्मक परिणाम केवल नए 2025 के कानून से ही उत्पन्न हो सकता है।

एफआईआर को “प्रथम दृष्टया अवैध और कानून के अधिकार के बिना” करार देते हुए न्यायालय ने कहा कि जिस तिथि को कथित चूक हुई, उस दिन जो कानून प्रभाव में ही नहीं था, उसके तहत किसी व्यक्ति पर अभियोजन नहीं चलाया जा सकता। साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि saving clause केवल पूर्व में की गई कार्रवाइयों को ही संरक्षित करता है, नई आपराधिक कार्यवाही को नहीं।

इसी आधार पर न्यायालय ने एफआईआर और उससे जुड़ी सभी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया। हालांकि, अदालत ने यह स्वतंत्रता दी कि यदि कानूनन संभव हो तो सक्षम प्राधिकारी Immigration and Foreigners Act, 2025 के प्रावधानों के तहत, सख्ती से उसी के अनुसार, आगे की कार्रवाई कर सकते हैं।

Tags:    

Similar News