मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी ठेकेदार द्वारा पूरा किया गया काम का बकाया भुगतान केवल इस आधार पर अनिश्चितकाल तक नहीं रोका जा सकता कि विभाग के पास उसके लिए बजट का प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने राज्य सरकार को ठेकेदार को 5 लाख रुपये की बकाया राशि 6 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ चार सप्ताह के भीतर जारी करने का निर्देश दिया।

जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने ठेकेदार की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने उसे सौंपा गया काम पूरा कर दिया, उसे केवल विभाग द्वारा आवश्यक बजट प्रावधान नहीं किए जाने के कारण उसका वैध भुगतान नहीं दिया जा सकता। प्रशासनिक या बजट संबंधी कठिनाइयां अपने आप में ऐसी राशि को अनिश्चितकाल तक रोकने का आधार नहीं हो सकतीं, जिसे सक्षम अधिकारी पहले ही भुगतान योग्य मान चुके हैं।

मामला मुरैना जिले में पोंटून पुल के संयोजन, खोलने, खड़ा करने, स्थापित करने और रखरखाव से जुड़े काम का है। याचिकाकर्ता ठेकेदार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए 5 लाख रुपये की बकाया राशि का भुगतान 8 प्रतिशत ब्याज के साथ कराने का अनुरोध किया।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उसने विभाग की ओर से सौंपा गया पूरा काम किया, लेकिन काम पूरा होने के बावजूद सक्षम अधिकारियों ने उसके 5 लाख रुपये के स्वीकृत बकाये का भुगतान नहीं किया।

राज्य सरकार की ओर से पेश सरकारी वकील ने बताया कि संबंधित अधिकारियों ने राशि उपलब्ध कराने के लिए कई बार मांग भेजी है, लेकिन अब तक धनराशि आवंटित नहीं हुई। राज्य की ओर से इसी आधार पर भुगतान में देरी का पक्ष रखा गया।

हाईकोर्ट ने पाया कि संबंधित अधिकारियों ने 11 दिसंबर 2024 को ही आवश्यक राशि आवंटित करने की मांग की। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि जब सक्षम विभागीय अधिकारियों द्वारा भुगतान की देनदारी स्वीकार की जा चुकी है, तब केवल बजट आवंटन का हवाला देकर राज्य भुगतान को अनिश्चितकाल तक टाल नहीं सकता।

कोर्ट ने कहा कि राज्य की ओर से खुद यह बताया गया कि संबंधित बजट मद में राशि प्राप्त होते ही याचिकाकर्ता को भुगतान के लिए उचित कार्रवाई की जाएगी। लेकिन याचिकाकर्ता काफी समय से अपने भुगतान का इंतजार कर रहा है। ऐसे में बकाया राशि को आगे भी रोके रखने के लिए राज्य की यह दलील पर्याप्त आधार नहीं देती।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बजट संबंधी कठिनाइयां प्रशासन की आंतरिक व्यवस्था का विषय हैं और उनका खामियाजा उस व्यक्ति को नहीं भुगतना चाहिए, जिसने अपना काम पूरा किया और जिसका भुगतान विभाग द्वारा स्वीकार किया जा चुका है।

हाईकोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया कि वह ठेकेदार को 5 लाख रुपये की राशि 6 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ चार सप्ताह के भीतर जारी कर भुगतान करे।

इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा किया।

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