मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जूनियर वकीलों के लिए न्यूनतम स्टाइपेंड तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश राज्य बार काउंसिल को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन के साथ परामर्श कर जूनियर वकीलों को शुरुआती तीन साल की प्रैक्टिस के दौरान दिए जाने वाले न्यूनतम स्टाइपेंड के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा।

जस्टिस विशाल मिश्रा ने राज्य बार काउंसिल को छह महीने के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। यह मामला अदालत को उस समय सामने आया, जब सुनवाई के दौरान बताया गया कि मामले में जूनियर वकील आयुष मिश्रा को कोई स्टाइपेंड नहीं दिया जा रहा है।

अदालत ने कहा कि राज्य बार काउंसिल को शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जूनियर वकीलों के लिए तीन साल की अवधि तक न्यूनतम स्टाइपेंड तय करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने चाहिए।

हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के 15 अक्टूबर 2024 के परिपत्र का भी उल्लेख किया। इस परिपत्र में राज्य बार काउंसिलों को जूनियर वकीलों को उनकी नियुक्ति की तारीख से कम-से-कम तीन साल तक न्यूनतम स्टाइपेंड दिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। इसमें शहरी क्षेत्रों के जूनियर वकीलों के लिए 20 हजार रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 15 हजार रुपये प्रतिमाह न्यूनतम स्टाइपेंड की सिफारिश की गई।

हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि BCI का यह परिपत्र केवल अनुशंसात्मक प्रकृति का है। इसी वजह से अदालत ने मध्य प्रदेश में न्यूनतम स्टाइपेंड के लिए अलग से दिशा-निर्देश तैयार करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा,

“राज्य बार काउंसिल, नियामक संस्था होने के नाते, यह सुनिश्चित करने की बड़ी जिम्मेदारी रखती है कि जूनियर वकीलों को उनके खर्च और आने-जाने की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्टाइपेंड मिले।”

हाईकोर्ट ने राज्य बार काउंसिल को यह भी पता लगाने का निर्देश दिया कि वर्तमान मामले में जूनियर वकील को उसके सीनियर वकीलों की ओर से स्टाइपेंड क्यों नहीं दिया जा रहा है।

अदालत ने कहा कि शुरुआती दौर में जूनियर वकील सीनियर वकीलों के साथ काम करते हुए कानूनी पेशे की बारीकियां सीखते हैं और उस समय उनके पास अपना पर्याप्त काम नहीं होता। इसलिए उन्हें रोजमर्रा के खर्च और पेशे से जुड़े अन्य खर्चों को पूरा करने के लिए आर्थिक सहायता मिलना जरूरी है।

हाईकोर्ट ने राज्य बार काउंसिल, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सीनियर वकीलों के साथ काम करने वाले जूनियर वकीलों को स्टाइपेंड मिले, ताकि वे प्रैक्टिस के शुरुआती वर्षों में अपने दैनिक खर्चों का वहन कर सकें।

मामले की मुख्य सुनवाई को आगे की तारीख के लिए स्थगित कर दिया गया।

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