फर्जी वकालतनामे और हलफनामों से धोखाधड़ी की आशंका, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शपथ आयुक्त का रजिस्टर लौटाने से किया इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालत में कथित तौर पर फर्जी वकालतनामे और हलफनामे दाखिल कर धोखाधड़ी किए जाने के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने के बाद शपथ आयुक्त का रजिस्टर लौटाने से इनकार किया।
अदालत ने कहा कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के मद्देनजर यह रजिस्टर अब मामले में साक्ष्य बन चुका है। रजिस्ट्रार ने कथित धोखाधड़ी के संबंध में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
जस्टिस दीपक खोट की पीठ ने 24 सितंबर 2026 की जांच रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद कहा कि रजिस्ट्रार ने प्रथम दृष्टया पाया है कि अपीलकर्ता के हलफनामों सहित कई दस्तावेज दाखिल कर अदालत के साथ धोखाधड़ी की गई। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि शपथ आयुक्त ने स्वयं स्वीकार किया है कि संबंधित वकील कभी भी उनके पास हलफनामे के सत्यापन के लिए उपस्थित नहीं हुए। ऐसी स्थिति में रजिस्टर आवेदक को वापस नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह साक्ष्य का हिस्सा बन चुका है। अदालत ने इसके साथ ही रजिस्टर से संबंधित आवेदन की कार्यवाही बंद की।
मामले में अपील मूल रूप से कई वकीलों के माध्यम से दायर की गई। इनमें एसपी मिश्रा, फाल्गुनी यादव, जितेंद्र मोहन शर्मा, शैलेंद्र कुमार पटेल, जॉयदीप भट्टाचार्य, सत्यार्थ बालाजी सिन्हा और सुरेंद्र कुमार शामिल थे। बाद में 5 अगस्त 2026 को अजय कुमार यादव के नाम से वकालतनामा दाखिल किया गया, जिसके साथ कथित तौर पर एसपी मिश्रा का अनापत्ति प्रमाणपत्र भी लगाया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता स्वयं अदालत में पेश हुईं। उनके साथ वकील जॉयदीप भट्टाचार्य और एसपी मिश्रा भी मौजूद थे। पहचान की पुष्टि के लिए अपीलकर्ता ने अपना पासपोर्ट अदालत के सामने पेश किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह अजय कुमार यादव को नहीं जानतीं और उन्होंने उनके पक्ष में कभी कोई वकालतनामा निष्पादित नहीं किया। एसपी मिश्रा ने भी अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार किया।
इससे पहले हाईकोर्ट ने प्रथम अपील को कथित वकालतनामे और हलफनामे के आधार पर वापस लेने के प्रयास की जांच के आदेश दिए। अपीलकर्ता और संबंधित वकील, दोनों ने ही इन दस्तावेजों से अपना संबंध होने से इनकार किया।
अदालत ने पाया था कि अपील वापस लेने के लिए 11 अगस्त 2026 को एक आवेदन दाखिल किया गया। इस पर अजय कुमार यादव के वकील के रूप में हस्ताक्षर थे और इसके समर्थन में अपीलकर्ता का हलफनामा भी लगाया गया, जिसे कथित तौर पर 9 अगस्त 2026 को शपथ दिलाई गई।
अपीलकर्ता ने इस हलफनामे से साफ इनकार करते हुए कहा था कि वह 9 अगस्त को जबलपुर गई ही नहीं थीं और उन्हें एके यादव नाम के किसी वकील की जानकारी भी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने किसी को अपील वापस लेने का निर्देश नहीं दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की आगे जांच के निर्देश दिए और संबंधित वकील तथा शपथ आयुक्त को अदालत में उपस्थित होने के लिए कहा।
मामले को अब 30 नवंबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।