मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि किसी आपराधिक मामले में केवल चार्जशीट दाखिल होने के आधार पर सरकारी कर्मचारी को स्वतः सेवा से बर्खास्त नहीं किया जा सकता।
अदालत ने एक होमगार्ड सैनिक को सेवा से हटाने का आदेश रद्द कर दिया।
जस्टिस आशीष श्रोती की पीठ ने कहा कि किसी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करते समय संबंधित प्राधिकारी को आरोपों की गंभीरता और उपलब्ध प्रारंभिक साक्ष्यों का आकलन करना जरूरी है। केवल FIR दर्ज होने और चालान पेश होने के आधार पर सेवा से हटाना उचित नहीं है।
मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ उसकी पत्नी ने क्रूरता, सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य और धमकी देने सहित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा दहेज प्रतिषेध कानून की धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया था।
याचिकाकर्ता ने मध्य प्रदेश होमगार्ड नियम, 2016 के अनुसार FIR दर्ज होने की सूचना जिला कमांडेंट को दी।
इसके बाद उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा गया कि नियमों के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
याचिकाकर्ता ने अपने जवाब में FIR दर्ज होने की परिस्थितियों की जानकारी दी लेकिन इसके बावजूद जनवरी में आदेश जारी कर उसे सेवा से हटा दिया गया।
अदालत ने कहा कि नियमों के अनुसार यदि किसी होमगार्ड के खिलाफ कोई अपराध दर्ज होता है तो उसे 48 घंटे के भीतर जिला कमांडेंट को इसकी सूचना देनी होती है। साथ ही किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से पहले कर्मचारी को सुनवाई का उचित अवसर दिया जाना आवश्यक है।
हाइकोर्ट ने कहा कि दंड तय करते समय प्राधिकारी को आरोपों की गंभीरता और उनके समर्थन में उपलब्ध सामग्री पर विचार करना चाहिए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यहां तक कि यदि किसी कर्मचारी को दोषी ठहराया भी जाता है, तब भी हर मामले में सेवा से बर्खास्त करना अनिवार्य नियम नहीं है।
अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता अभी दोषी सिद्ध नहीं हुआ है और केवल FIR दर्ज हुई तथा चालान पेश किया गया। ऐसे में सेवा से हटाने का आदेश नियमों के अनुरूप नहीं है।
इन टिप्पणियों के साथ हाइकोर्ट ने सेवा से हटाने का आदेश रद्द करते हुए मामले को जिला कमांडेंट के पास वापस भेज दिया और निर्देश दिया कि अदालत की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए नया आदेश पारित किया जाए।