भोजशाला मंदिर - कमाल मौला विवाद: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पक्षकारों से ASI सर्वे रिपोर्ट पर दो हफ़्ते में आपत्तियां दर्ज करने को कहा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (23 फरवरी) को सभी पार्टियों को विवादित भोजशाला मंदिर सह कमाल मौला मस्जिद परिसर में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ASI) द्वारा किए गए साइंटिफिक सर्वे के बारे में अपनी आपत्तियां और राय जमा करने का निर्देश दिया।
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने आगे आदेश दिया कि 22 जनवरी, 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार साइट की यथास्थिति बनाए रखी जाए।
बेंच ने निर्देश दिया;
"पक्षकारों को इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि रिपोर्ट उन्हें पहले ही दी जा चुकी है। उन्होंने आगे कहा कि पक्षकारों ने अभी तक रिपोर्ट पर आपत्तियां, राय और सुझाव फाइल नहीं किए । इसे देखते हुए ऐसा लगता है कि रिपोर्ट को इस कोर्ट के 4-7-2024 के आदेश के अनुसार खोला गया, यह बात सुप्रीम कोर्ट के ध्यान में नहीं लाई गई। इसलिए II (सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पैरा 2) में निर्देश जारी किए गए। इसे देखते हुए अब खुली अदालत में रिपोर्ट को खोलने और उसके बाद दोनों पक्षों को कॉपी देने की कोई ज़रूरत नहीं है। अब पक्षकारों को आज से दो हफ़्ते का समय दिया जाता है ताकि वे अपनी-अपनी आपत्तियां, राय, सुझाव और/या सुझाव (9-III में दिए गए निर्देशों के अनुसार) जमा कर सकें... मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च, 2026 को होगी।"
यह विवाद भोजशाला से जुड़ा है, जो ASI द्वारा सुरक्षित 11वीं सदी का एक स्मारक है। हिंदू इस जगह को वाग्देवी या देवी सरस्वती का मंदिर मानते हैं, जबकि मुसलमान इसे कमाल मौला मस्जिद मानते हैं। ASI के 2003 के एक इंतज़ाम के तहत हिंदू मंगलवार को इस कॉम्प्लेक्स में पूजा करते हैं, जबकि मुसलमान शुक्रवार को वहां नमाज़ पढ़ते हैं।
11 मार्च, 2024 को हाईकोर्ट ने ASI को उस जगह पर लेटेस्ट तरीकों का इस्तेमाल करके जांच और सर्वे करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सर्वे कम से कम पांच सीनियर ASI अधिकारियों की एक एक्सपर्ट कमिटी करे। इसने जगह की पूरी फोटोग्राफी का भी आदेश दिया और अंदर मिली कलाकृतियों और स्ट्रक्चरल चीज़ों की साइंटिफिक जांच के लिए बंद और सील किए गए कमरों को खोलने की इजाज़त दी।
इसके बाद 1 अप्रैल, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि सर्वे के नतीजे पर कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए और कोई फिजिकल खुदाई नहीं की जानी चाहिए, जिससे साइट का नेचर बदल सकता है।
4 जुलाई, 2024 को हाईकोर्ट ने ASI की सर्वे रिपोर्ट खोली।
यह मामला अब 16 मार्च, 2026 के लिए सूचीबद्ध है।
Case Title: QAZI ZAKULLAH v THE STATE OF MADHYA PRADESH [WA - 559/2026]