विदेशी वकील भारत में गवाहों से क्रॉस एग्जामिनेशन नहीं कर सकते, केवल कार्यवाही देख सकते हैं: केरल हाईकोर्ट

Update: 2026-07-15 13:42 GMT

केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारत में अदालत द्वारा नियुक्त वकील आयुक्त के समक्ष विदेशी वकील गवाहों की मुख्य परीक्षा या क्रॉस एग्जामिनेशन नहीं कर सकते।

अदालत ने कहा कि साक्ष्य दर्ज करना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और यह भारत में विधि व्यवसाय के दायरे में आता है, जिसकी अनुमति केवल भारतीय कानून के अनुसार अधिकृत वकीलों को है।

जस्टिस मोहम्मद नियास सी. पी. ने कहा,

"अधिवक्ता आयुक्त के समक्ष साक्ष्य दर्ज करना न्यायिक कार्यवाही का हिस्सा है और यह भारत में विधि व्यवसाय की श्रेणी में आता है। विदेशी वकीलों को ऐसे कार्य की अनुमति नहीं दी जा सकती।"

मामला अमेरिका में पंजीकृत एक निजी कंपनी द्वारा दायर वाद से जुड़ा है। कंपनी ने एक भारतीय नागरिक सहित तीन लोगों के खिलाफ अमेरिका की अदालत में धोखाधड़ी, अनुबंध उल्लंघन और अवैध लाभ अर्जित करने के आरोपों के आधार पर धन वसूली का मुकदमा दायर किया।

अमेरिकी अदालत ने साक्ष्य जुटाने के लिए भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय को अनुरोध पत्र भेजा था। इसके बाद केरल हाईकोर्ट ने उस अनुरोध पर अमल कराने के लिए अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त किया, जिसे गवाहों के बयान दर्ज करने और आवश्यक दस्तावेज मंगाने का अधिकार दिया गया।

बाद में मुकदमे के अन्य दो पक्षकारों ने आवेदन देकर अपने अमेरिकी वकीलों को भारत में अधिवक्ता आयुक्त के समक्ष गवाहों से जिरह करने की अनुमति देने की मांग की।

हाईकोर्ट ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि हेग अभिसमय के तहत भी अनुरोध पर कार्रवाई उसी देश के कानून के अनुसार की जाती है, जहां साक्ष्य दर्ज किए जा रहे हों। इसलिए भारत में लागू कानून और नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

कोर्ट ने एडवोकेट एक्ट और भारतीय विधिज्ञ परिषद के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि विदेशी वकीलों को केवल सीमित परिस्थितियों में, जैसे विदेशी कानून से जुड़े मामलों, गैर-विवादित अंतरराष्ट्रीय मामलों और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में ही सीमित रूप से कार्य करने की अनुमति है।

अदालत ने कहा कि किसी अदालत या उसके द्वारा नियुक्त प्राधिकारी के समक्ष पेश होना, पक्षकार की ओर से बहस करना या गवाहों से क्रॉस एग्जामिनेशन करना भारत में विधि व्यवसाय का हिस्सा है और यह अधिकार केवल एडवोकेट एक्ट के तहत पंजीकृत वकीलों को ही प्राप्त है।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि एडवोकेट एक्ट की धारा 32 के तहत विवेकाधिकार का प्रयोग कानून के विपरीत नहीं किया जा सकता।

कहा गया,

"जिस कार्य की सीधे अनुमति नहीं दी जा सकती, उसे अप्रत्यक्ष रूप से भी अनुमति नहीं दी जा सकती।"

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि विदेशी वकील कार्यवाही में उपस्थित रह सकते हैं, उसे देख सकते हैं और उसका अवलोकन कर सकते हैं, लेकिन गवाहों की परीक्षा या क्रॉस एग्जामिनेशन करने की अनुमति उन्हें नहीं दी जाएगी।

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