भवन मंजूरी के बाद Occupancy Certificate के लिए नई शर्त नहीं लगा सकते: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि भवन का Occupancy Certificate (OC) जारी करने के लिए नगरपालिका अधिकारी बाद में ऐसी शर्त नहीं लगा सकते, जिसके तहत मालिक को बिना मुआवजे के सड़क चौड़ीकरण के लिए जमीन छोड़नी पड़े, खासकर जब भवन लाइसेंस के समय ऐसी शर्त नहीं लगाई गई थी।
जस्टिस बी.एम. श्याम प्रसाद की एकल पीठ ने संपत्ति मालिकों की याचिका स्वीकार करते हुए अधिकारियों को Relinquishment Deed की मांग किए बिना OC जारी करने का निर्देश दिया, बशर्ते निर्माण स्वीकृत योजना के अनुरूप हो।
क्या था मामला?
याचिकाकर्ताओं के पास डोड्डाकन्नहल्ली, बेलंदूर में 2,648.81 वर्ग मीटर की संपत्ति थी। उन्हें 5 फरवरी 2024 को Building Plan और Building Licence तथा 15 फरवरी 2025 को Commencement Certificate मिला था।
निर्माण पूरा होने के बाद OC के लिए आवेदन करने पर अधिकारियों ने जुलाई 2026 में कहा कि 24 मीटर की मौजूदा सड़क को Revised Master Plan, 2015 के तहत 45 मीटर तक चौड़ा किया जाना है। इसके लिए याचिकाकर्ताओं से बिना मुआवजे जमीन छोड़ने की Relinquishment Deed मांगी गई।
कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि भवन लाइसेंस और Commencement Certificate जारी करते समय ऐसी कोई शर्त नहीं लगाई गई थी। इसलिए बाद में post-facto शर्त नहीं थोपी जा सकती।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी शर्त के लिए विशिष्ट वैधानिक प्रावधान होना जरूरी है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 300A का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को कानून के अधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने संबंधित endorsement रद्द करते हुए अधिकारियों को आठ सप्ताह के भीतर OC जारी करने या अस्वीकार करने के कारण बताने का निर्देश दिया।
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भविष्य में सड़क चौड़ीकरण के लिए कानून के अनुसार होने वाली अधिग्रहण कार्यवाही पर इस आदेश का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।