प्रेम विवाह में दहेज मांग का आरोप पहली नजर में मानना मुश्किल, कर्नाटक हाईकोर्ट ने पति को जमानत दी
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि यदि विवाह प्रेम विवाह (लव मैरिज) है, तो शादी के समय और उसके बाद दहेज मांगे जाने के आरोप पहली नजर में स्वीकार करना कठिन हो जाता है। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने और दहेज प्रताड़ना के आरोपों में गिरफ्तार एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति को जमानत दे दी।
जस्टिस एस. विश्वजीत शेट्टी की एकल पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि पति-पत्नी ने वर्ष 2023 में दोनों परिवारों की सहमति से प्रेम विवाह किया था। दोनों निजी कंपनियों में कार्यरत थे और उनका दो वर्ष का एक बेटा भी है। वे बेंगलुरु में किराए के मकान में अकेले रहते थे।
मामले के अनुसार, वर्ष 2026 में पत्नी ने आत्महत्या का प्रयास किया। पति उसे तुरंत निजी अस्पताल ले गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद मृतका की मां ने शिकायत दर्ज कराई कि उसकी बेटी को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा दहेज निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर पति को गिरफ्तार कर लिया। सत्र न्यायालय ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आरोपपत्र का अवलोकन करते हुए कहा कि पति और पत्नी बेंगलुरु में अलग रहते थे तथा जांच में यह भी सामने आया कि दहेज प्रताड़ना के मामले में आरोपी बनाए गए परिवार के अन्य सदस्य उनके साथ नहीं रहते थे।
अदालत ने कहा कि चूंकि यह प्रेम विवाह था, इसलिए शादी के समय दहेज मांगने और उसके बाद भी लगातार दहेज की मांग किए जाने के आरोप पहली नजर में सहज रूप से स्वीकार नहीं किए जा सकते।
हालांकि, अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी उल्लेख किया, जिसमें मृतका के होंठ पर मामूली चोट का जिक्र था। अदालत ने कहा कि इससे प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि घटना से ठीक पहले पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था।
इसके बावजूद अदालत ने माना कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है, इसलिए अब आरोपी की आगे हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।
साथ ही, दंपति के दो वर्ष के बेटे की देखभाल की जिम्मेदारी भी फिलहाल आरोपी पिता पर है।
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदारों के आधार पर जमानत दे दी।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी नियमित रूप से ट्रायल कोर्ट में उपस्थित रहेगा, गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा और भविष्य में किसी समान अपराध में शामिल नहीं होगा।