झारखंड हाईकोर्ट ने चतरा शहर को NH-99 (न्यू NH-22) और NH-100 (न्यू NH-522) से जोड़ने वाली प्रस्तावित बाईपास सड़क के निर्माण पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि मौजूदा एलाइनमेंट (प्रस्तावित मार्ग) के तहत 13,681 पूर्ण विकसित पेड़ों (Full-Grown Trees) को काटना पड़ेगा।

जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ (Single Bench) मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिका में सड़क का एलाइनमेंट बदलकर वैकल्पिक मार्ग (Alternative Route) अपनाने की मांग की गई थी, ताकि बड़ी संख्या में पेड़ों को बचाया जा सके।

क्या है मामला?

याचिकाकर्ता ने कहा कि यदि प्रस्तावित सड़क के मार्ग में बदलाव किया जाता है, तो उसकी जमीन पर मौजूद करीब 300 पूर्ण विकसित पेड़ों को बचाया जा सकता है।

इसके बाद हाईकोर्ट ने अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर यह बताने का निर्देश दिया था कि मौजूदा एलाइनमेंट में कितने पेड़ काटने पड़ेंगे और क्या सड़क का मार्ग बदला जा सकता है।

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मौजूदा एलाइनमेंट में वन क्षेत्र (Forest Area) सहित कुल 13,681 पेड़ों को काटना पड़ेगा। अधिकारियों के अनुसार सभी चिन्हित पेड़ पूर्ण विकसित (Full-Grown) हैं।

'जंगल सिर्फ पेड़ों का नाम नहीं'

मामले पर गंभीर चिंता जताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि 13,681 पूर्ण विकसित पेड़ कोई छोटी संख्या नहीं है। इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से पर्यावरण और पारिस्थितिकी (Ecology) पर गंभीर असर पड़ेगा।

कोर्ट ने कहा—

“जंगल सिर्फ पेड़ों का नाम नहीं है। इसमें जानवर, पक्षी, कीड़े-मकौड़े और अन्य जीव-जंतु भी शामिल हैं। यह पूरा एक Ecosystem है।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि ये पेड़ केवल छतरी (Canopy) नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण के फेफड़े (Lungs) हैं और विकास के नाम पर इन्हें अंधाधुंध नहीं काटा जा सकता।

नए पौधे पुराने पेड़ों की भरपाई नहीं कर सकते

हाईकोर्ट ने कहा कि क्षतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) के तहत बड़ी संख्या में नए पौधे लगाने से मौजूदा पर्यावरण और Ecosystem की पूरी तरह भरपाई नहीं हो सकती।

कोर्ट ने कहा कि लगाए गए पौधों को पूर्ण विकसित पेड़ और जंगल बनने में 100 साल से अधिक समय लग सकता है। इस दौरान पर्यावरण और पारिस्थितिकी को होने वाला नुकसान अपूरणीय (Irreparable) हो सकता है।

कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि कुछ मील की दूरी कम करने के लिए जंगल, पर्यावरण, वनस्पति (Flora), जीव-जंतु (Fauna) और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं हो सकता।

पेड़ों की कटाई और निर्माण पर रोक

2 सितंबर 2026 के पत्र में 13,681 पेड़ों को काटे जाने की जानकारी सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।

अंतरिम आदेश (Interim Order) के तहत कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगले आदेश तक चिन्हित किसी भी पेड़ को नहीं काटा जाएगा।

साथ ही, ऐसे हिस्से में सड़क का निर्माण भी नहीं किया जाएगा, जहां इन पेड़ों की कटाई आवश्यक हो।

हालांकि, संबंधित एजेंसियों को सड़क के एलाइनमेंट (मार्ग) पर दोबारा विचार करने और वैकल्पिक मार्ग तलाशने की स्वतंत्रता दी गई है।

कोर्ट ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी पर्यावरण की संरक्षक (Custodian) है और इसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना उसकी जिम्मेदारी है।

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