JPSC परीक्षा जांच में अभ्यर्थियों के उत्पीड़न की शिकायत, झारखंड हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस को बनाया निगरानी अधिकारी
झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की कार्रवाई पर नजर रखने के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को निगरानी अधिकारी नियुक्त किया। यह व्यवस्था उन अभ्यर्थियों की शिकायतों के मद्देनजर की गई, जिन्होंने जांच के दौरान उत्पीड़न और अनुचित दबाव की आशंका जताई।
मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ कर रही थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों की ओर से पेश वकील ने कहा कि जांच कर रही SIT कुछ निर्दोष अभ्यर्थियों को भी नोटिस या पूछताछ के लिए बुला रही है और ऐसे मामलों में कथित तौर पर उत्पीड़न तथा अनुचित दबाव की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें जांच पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है लेकिन निर्दोष लोगों को परेशान किए जाने से रोकने के लिए अदालत को उचित कदम उठाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि केवल किसी व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलाया जाना अपने आप में उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता। जांच एजेंसी को जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर किसी व्यक्ति को नोटिस जारी करने या पूछताछ के लिए बुलाने का अधिकार है। हालांकि निष्पक्षता और न्याय के हित को देखते हुए अदालत ने SIT की जांच की निगरानी के लिए रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को नियुक्त करना उचित माना।
कोर्ट ने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच के दौरान किसी नागरिक को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए। रिटायर्ड जस्टिस चौधरी उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों को देखेंगे। यह निगरानी वर्तमान रिट याचिकाओं की कार्यवाही से पूरी तरह स्वतंत्र रहेगी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिटायर्ड जस्टिस की निगरानी से SIT की जांच पर रोक नहीं लगेगी। जांच एजेंसी कानून के अनुसार जांच और पूछताछ जारी रखने के लिए स्वतंत्र होगी। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि SIT स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से जांच पूरी करेगी।
राज्य सरकार ने निगरानी की किसी ऐसी व्यवस्था का विरोध किया, जिससे जांच पर रोक लगे। राज्य की ओर से कहा गया कि जांच अधिकारियों को जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर किसी भी व्यक्ति को नोटिस जारी करने या पूछताछ के लिए बुलाने का अधिकार है। हालांकि, राज्य के वकील ने यह भी कहा कि कथित कठोर रवैये से जुड़ी आशंकाओं की निगरानी हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस जैसे स्वतंत्र व्यक्ति से कराई जा सकती है।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन चयनित अभ्यर्थियों को SIT की ओर से समन जारी किया जाता है, उन्हें जांच में पूरा सहयोग करना होगा। यदि किसी अभ्यर्थी को उत्पीड़न की शिकायत है तो वह रिटायर्ड जस्टिस चौधरी के समक्ष शिकायत कर सकता है। वह शिकायत की वास्तविकता की जांच करेंगे और शिकायत सही पाए जाने पर एसआईटी प्रमुख को इसकी जानकारी देकर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई के लिए कहेंगे। SIT को जांच की प्रगति के साथ इस संबंध में रिटायर्ड जस्टिस को रिपोर्ट भी देनी होगी।
कोर्ट ने कहा कि निगरानी अधिकारी की नियुक्ति का उद्देश्य जांच को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाए रखना, जांच का सामना कर रहे लोगों की आशंकाओं को दूर करना और जांच प्रक्रिया में संतुलन बनाए रखना है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इसे SIT की जांच में हस्तक्षेप या उसकी कार्यप्रणाली पर किसी प्रतिकूल टिप्पणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
इससे पहले हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षाओं के माध्यम से हुई नियुक्तियों को रद्द करने वाले राज्य सरकार के आदेशों पर अंतरिम रोक लगाई थी। इन याचिकाओं में पूरी विज्ञप्ति और चयन प्रक्रिया को रद्द करने के फैसले की वैधता को चुनौती दी गई। अदालत ने पहले दिए गए अंतरिम आदेश को अगले आदेश तक जारी रखने का निर्देश दिया।
मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:30 बजे होगी।
अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें