हाईकोर्ट के सख्त निर्देश: हजारीबाग में चार महीने में 20 प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल चालू करे सरकार
झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए राज्य सरकार और हजारीबाग नगर निगम को कई अहम निर्देश दिए। अदालत ने 20 प्रमुख चौराहों पर स्वचालित ट्रैफिक लाइट प्रबंधन प्रणाली को चार महीने के भीतर चालू करने और उसका परीक्षण पूरा करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सिर्फ योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है बल्कि उनके क्रियान्वयन और नियमित निगरानी पर भी ध्यान देना होगा।
चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ हजारीबाग में बदहाल यातायात व्यवस्था को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में शहर में यातायात नियंत्रण और नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध समाधान करने की मांग की गई।
याचिका में प्रभावी ट्रैफिक लाइट निगरानी व्यवस्था की कमी, पर्याप्त सीसीटीवी कैमरों का अभाव, पार्किंग की समस्या, सार्वजनिक फुटपाथों पर अतिक्रमण और यातायात नियमों के पर्याप्त पालन नहीं होने जैसे मुद्दे उठाए गए। याचिका में बरकागांव मोड़ और कारगिल चौक पर हुई जानलेवा दुर्घटनाओं का भी उल्लेख किया गया। अनियंत्रित यातायात के कारण पैदल यात्रियों और वाहन चालकों के घायल होने की घटनाओं का भी जिक्र किया गया।
यह जनहित याचिका वर्ष 2021 से हाईकोर्ट में लंबित थी। इस दौरान अदालत की अलग-अलग पीठों ने हजारीबाग की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए प्रशासन को कई निर्देश दिए। जुलाई 2024 में हाईकोर्ट ने तत्कालीन अधिवक्ता प्रशांत पल्लव को वकील आयुक्त नियुक्त किया था और उन्हें हजारीबाग का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।अदालत ने कहा कि वकील आयुक्त की रिपोर्ट में शहर की यातायात व्यवस्था की अव्यवस्था की काफी हद तक पुष्टि हुई। रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण चौराहों पर यातायात पुलिसकर्मियों की अनुपस्थिति, स्वचालित ट्रैफिक सिग्नल की कमी, अधिकांश सीसीटीवी कैमरों के काम नहीं करने, बेतरतीब पार्किंग, हेलमेट और सीट बेल्ट से जुड़े नियमों के कमजोर पालन तथा पुलिस और यातायात कर्मियों की कमी का उल्लेख किया गया।
इसके बाद राज्य सरकार और नगर निगम की ओर से हलफनामे दाखिल कर अदालत को बताया गया कि समस्याओं के समाधान के लिए कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि अधिकारियों की ओर से उठाए गए कदम याचिका में उठाए गए सभी मुद्दों का समाधान नहीं करते हैं।
अदालत ने यह भी गौर किया कि यातायात से जुड़ी अलग-अलग समस्याओं की जिम्मेदारी को लेकर राज्य प्रशासन और नगर निगम के बीच एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने की स्थिति बनी हुई है। इस पर अदालत ने दोनों पक्षों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
खंडपीठ ने कहा कि वह यह निष्कर्ष नहीं निकाल सकती कि अधिकारियों ने कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया, लेकिन व्यवस्था को लागू करने और उसकी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
हाईकोर्ट ने कहा कि स्वच्छ, सम्मानजनक और यथासंभव सुरक्षित शहरी जीवन का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। अदालत ने यह भी कहा कि संविधान का अनुच्छेद 19(1)(घ) नागरिकों को देश में स्वतंत्र रूप से आने-जाने का अधिकार देता है। इसलिए अधिकारियों को मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और संबंधित नगर निकाय कानूनों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
अदालत ने सड़क किनारे सामान बेचने वाले लोगों से संबंधित वैधानिक व्यवस्था को भी ध्यान में रखने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि उद्देश्य सड़क किनारे कारोबार करने वाले लोगों को पूरी तरह हटाना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें उनका कारोबार वाहनों के आवागमन वाले रास्तों और पैदल चलने योग्य फुटपाथों के साथ व्यवस्थित तरीके से चल सके।
अदालत ने हजारीबाग नगर निगम के नगर आयुक्त को 19 अगस्त 2026 को मेसर्स कीहोल डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड के साथ हुए समझौते के तहत स्वचालित ट्रैफिक लाइट प्रबंधन प्रणाली को चार महीने के भीतर पूरा कर उसका परीक्षण शुरू कराने का निर्देश दिया।
इस व्यवस्था का परीक्षण अदालत द्वारा चिन्हित कम से कम 20 प्रमुख चौराहों पर किया जाएगा। इनमें जिला अदालत चौक, कोर्रा चौक, मटवारी चौक, बरकागांव मोड़, डीवीसी चौक, झंडा चौक, पुराना बस स्टैंड चौक, नया बस स्टैंड चौक और पंच मंदिर चौक समेत अन्य प्रमुख चौराहे शामिल हैं।
अदालत ने ट्रैफिक सिग्नल की निगरानी और रखरखाव के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित करने का भी निर्देश दिया। इसमें नगर निगम का असिस्टेंट इंजीनियर या उससे ऊपर के स्तर का अधिकारी, निरीक्षक या उससे ऊपर के पद का यातायात पुलिस अधिकारी और संबंधित ठेकेदार का एक प्रतिनिधि शामिल होगा।
इस टीम को रोजाना यह रिकॉर्ड रखना होगा कि कौन-सा ट्रैफिक सिग्नल कितने समय तक बंद रहा। खराब होने वाले सिग्नलों को निर्धारित समय सीमा के भीतर दोबारा चालू कराने की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी।
हाईकोर्ट ने वर्ष 2017 से अब तक लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की पूरी सूची भी पेश करने का निर्देश दिया। इसके अलावा 20 प्रमुख चौराहों पर व्यस्त समय के दौरान तैनात अधिकारियों का विवरण और प्रत्येक स्थान के लिए जिम्मेदार अधिकारी की जानकारी देने को कहा गया।
अदालत ने यातायात पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण को भी पूरा करने का निर्देश दिया। यह प्रशिक्षण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समन्वय से कराया जाएगा।
भारी और व्यावसायिक वाहनों के आवागमन को नियंत्रित करने, पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था करने, सड़क किनारे कारोबार के लिए निर्धारित और प्रतिबंधित क्षेत्र तय करने तथा फुटपाथ, चौराहों, जेब्रा क्रॉसिंग और सड़कों से अतिक्रमण हटाने को लेकर भी अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिए।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये निर्देश अधिकारियों पर पहले से लागू वैधानिक जिम्मेदारियों के अतिरिक्त हैं। यातायात सुरक्षा और व्यवस्था से जुड़े कानूनों के तहत निर्धारित दायित्वों से अधिकारी इन निर्देशों के आधार पर बच नहीं सकते।
इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने हजारीबाग की यातायात व्यवस्था से संबंधित जनहित याचिका का निपटारा किया। अदालत ने मामले में किसी पक्ष पर खर्च लगाने का आदेश नहीं दिया।