हाईकोर्ट की अवमानना ​​की चेतावनी के बाद झारखंड सरकार ने चार हफ़्तों के अंदर राज्य सूचना आयोग को चालू करने का वादा किया

Update: 2026-02-03 12:13 GMT

29 जनवरी, 2026 को झारखंड राज्य ने झारखंड हाईकोर्ट को बताया कि राज्य सूचना आयोग, जो अपने अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति न होने के कारण काम नहीं कर रहा था, उसे चार हफ़्तों के अंदर चालू कर दिया जाएगा।

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी।

सुनवाई के दौरान, झारखंड सरकार के मुख्य सचिव अविनाश कुमार और कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग के सचिव प्रवीन कुमार टोप्पो कोर्ट में पेश हुए और आश्वासन दिया कि राज्य आयोग को तय चार हफ़्तों के अंदर चालू करने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाएगा।

मामले की पृष्ठभूमि

यह स्पष्टीकरण एक रिट याचिका से उत्पन्न अपील में दिया गया। याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट के असाधारण क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल करने की मांग की थी, इस आधार पर कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 19(3) के तहत वैधानिक उपाय का लाभ नहीं उठाया जा सकता, क्योंकि अध्यक्ष और सदस्यों की अनुपस्थिति के कारण राज्य सूचना आयोग काम नहीं कर रहा था। एक सिंगल जज ने रिट याचिका खारिज की, जिसके कारण यह अपील की गई।

इससे पहले 12 दिसंबर, 2025 के एक आदेश में हाईकोर्ट ने अंजली भारद्वाज बनाम भारत संघ (2019) 18 SCC 246 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को सूचना आयोग में खाली पदों को भरने का निर्देश दिया और सरकार को समय पर नियुक्तियां करने की सलाह दी।

हाईकोर्ट ने कहा था:

“लेकिन बहुत हैरानी की बात है कि राज्य सरकार अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति न करके राज्य सूचना आयोग के ठीक से काम करने की परवाह नहीं कर रही है और राज्य सूचना आयोग काम नहीं कर रहा है... इसलिए राज्य का राज्य सूचना आयोग को काम न करने देना न केवल वैधानिक आदेश के विपरीत है, बल्कि भारत के संविधान की भावना का भी उल्लंघन है।”

12 दिसंबर के आदेश में कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर अगली सुनवाई की तारीख तक राज्य सूचना आयोग को चालू नहीं किया गया तो कोर्ट स्वतः संज्ञान लेगा और राज्य के खिलाफ उसके वैधानिक दायित्वों की अनदेखी करने के लिए अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करेगा। इसके बाद, क्योंकि अगली सुनवाई की तारीख पर भी कमीशन काम नहीं कर रहा था, इसलिए हाईकोर्ट ने राज्य के चीफ सेक्रेटरी को हलफनामा दाखिल करने और कोर्ट के सामने पेश होने के लिए बुलाया।

कोर्ट के सामने दिए गए बयान के आधार पर कि कमीशन को चार हफ़्तों के अंदर चालू कर दिया जाएगा, हाईकोर्ट ने अब मामले को आगे की सुनवाई के लिए 27 फरवरी को लिस्ट करने का निर्देश दिया।

Title: Birendar Singh v. State of Jharkhand and Ors.

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