विदेश यात्रा का अधिकार मौलिक अधिकार: झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक की पत्नी को इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति दी

Update: 2026-02-09 08:43 GMT

झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व झारखंड विधायक एवं मंत्री कमलेश कुमार सिंह की पत्नी पर लगाए गए जमानत की शर्तों में संशोधन करते हुए उन्हें इलाज के लिए अमेरिका या यूनाइटेड किंगडम (UK) की यात्रा करने की अनुमति दी।

कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का हिस्सा है।

जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की एकल पीठ ने 13 मई 2014 को पारित उस आदेश में संशोधन किया, जिसके तहत याचिकाकर्ता को अपना पासपोर्ट जमा करने और विदेश यात्रा से रोका गया।

पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता जो अपने पति के खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति के मामले में अभियुक्त हैं, को पहले ही नियमित जमानत मिल चुकी थी। वर्तमान याचिका केवल उस शर्त के खिलाफ थी जिसमें उन्हें विदेश जाने से रोका गया था और पासपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया।

याचिकाकर्ता की उम्र लगभग 58 वर्ष है और उन्होंने कोर्ट को बताया कि वे गंभीर एवं जानलेवा लिवर रोग से पीड़ित हैं।

25 जून, 2025 को दिल्ली के प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बायलरी साइंसेज (ILBS) में कराई गई लिवर बायोप्सी में यह सामने आया कि उन्हें लेननेक सिरोसिस सबस्टेज-4B है, जो क्रॉनिक लिवर डिजीज का उन्नत और चिकित्सकीय रूप से प्री-कैंसरस चरण माना जाता है।

यह भी बताया गया कि उनके करीबी रिश्तेदार अमेरिका और यूके में रहते हैं और वहां बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने यह भी दलील दी कि वे वर्ष 2014 से लगातार ट्रायल में सहयोग कर रही हैं। जमानत की किसी शर्त का उल्लंघन नहीं किया और अब तक 100 से अधिक गवाहों में से केवल 46 के बयान ही दर्ज हो पाए हैं।

सीबीआई की आपत्ति

सीबीआई ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता एक गंभीर आर्थिक अपराध में अभियुक्त हैं और विदेश यात्रा पर रोक लगाने की शर्त एक समन्वय पीठ द्वारा जमानत देते समय लगाई गई।

हाईकोर्ट का दृष्टिकोण

हाईकोर्ट ने ILBS द्वारा जारी मेडिकल रिपोर्ट्स का संज्ञान लिया और माना कि याचिकाकर्ता वास्तव में गंभीर लिवर रोग से पीड़ित हैं।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि वर्ष 2014 से उनका पासपोर्ट कोर्ट के पास जमा है और उनके खिलाफ ट्रायल में सहयोग न करने या गवाहों को प्रभावित करने का कोई आरोप नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों मेनका गांधी बनाम भारत संघ और सतीश चंद्र वर्मा बनाम भारत संघ पर भरोसा करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार एक महत्वपूर्ण मानव अधिकार है और यह अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित मौलिक अधिकार का हिस्सा है।

कोर्ट ने कहा,

“याचिकाकर्ता सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं जो स्टेज-4B पर है। विदेश यात्रा उनका मौलिक अधिकार है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से मान्यता दी है। ऐसे में 13.05.2014 के जमानत आदेश में संशोधन किया जाना उचित है।”

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता का पासपोर्ट उन्हें वापस सौंपा जाए।

हालांकि यह स्पष्ट किया गया,

प्रत्येक विदेश यात्रा से पहले संबंधित अदालत से पूर्व अनुमति लेनी होगी।

यात्रा की अवधि और भारत लौटने की तिथि बताते हुए लिखित अंडरटेकिंग दाखिल करनी होगी।

विदेश से लौटने के बाद अदालत को सूचित करना अनिवार्य होगा।

इन शर्तों के साथ झारखंड हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति प्रदान की।

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