नाबालिग के पासपोर्ट में गलत जन्मतिथि वर्षों पुरानी होने पर भी सुधार से इनकार नहीं कर सकते: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट में दर्ज जन्मतिथि कई वर्षों से गलत होने के आधार पर पासपोर्ट प्राधिकरण किसी नाबालिग की जन्मतिथि सुधारने के अनुरोध को खारिज नहीं कर सकता खासकर तब जब बाद में स्कूल के रिकॉर्ड सही कर दिए गए हों और पुराना जन्म प्रमाणपत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा रद्द किया जा चुका हो।
जस्टिस संजय परिहार ने मोहम्मद फाजली इलाही की ओर से उनके पिता के माध्यम से दायर याचिका मंजूर करते हुए पासपोर्ट प्राधिकरण को सही जन्मतिथि के साथ नया पासपोर्ट जारी करने के आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने इस प्रक्रिया को आदेश की प्रति मिलने के दो सप्ताह के भीतर पूरा करने को कहा।
याचिकाकर्ता ने बताया कि उसकी जन्मतिथि शुरुआती दौर में स्कूल रिकॉर्ड में गलती से 25 मई 2008 के बजाय 12 जुलाई 2004 दर्ज हो गई थी। यही गलत जन्मतिथि बाद में उसके पहले पासपोर्ट में भी दर्ज हो गई।
गलती का पता चलने के बाद 2018 में उसने काकापोरा के जोनल शिक्षा अधिकारी से संपर्क किया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्कूल रिकॉर्ड में उसकी जन्मतिथि सुधारकर 25 मई 2008 कर दी गई। इसके बाद दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के प्रमाणपत्रों में भी यही सही जन्मतिथि दर्ज रही।
याचिकाकर्ता ने नया जन्म प्रमाणपत्र भी पेश किया, जिसमें जन्मतिथि 25 मई 2008 दर्ज थी। पहले जारी जन्म प्रमाणपत्र में गलत जन्मतिथि दर्ज थी, जिसे बाद में सक्षम प्राधिकारी ने रद्द कर दिया।
इसके बावजूद जब याचिकाकर्ता ने पासपोर्ट दोबारा जारी करने के लिए आवेदन किया तो पासपोर्ट प्राधिकरण ने पुरानी जन्मतिथि ही बरकरार रखी। जन्मतिथि में सुधार के लिए बाद में किए गए अभ्यावेदनों पर भी कार्रवाई नहीं की गई।
प्राधिकरण की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता ने एक दशक से अधिक समय तक पुराने पासपोर्ट में दर्ज जन्मतिथि पर कोई आपत्ति नहीं की और अब इतने वर्षों बाद जन्मतिथि बदलने की मांग उचित नहीं है।
हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने विदेश मंत्रालय के 26 नवंबर 2015 के परिपत्र के उस प्रावधान का हवाला दिया, जिसके तहत सामान्य तौर पर पासपोर्ट जारी होने के पांच साल बाद जन्मतिथि में सुधार की मांग पर रोक है। हालांकि, इस प्रावधान में उस व्यक्ति के लिए विशेष छूट है जो गलत जन्मतिथि वाले पासपोर्ट के जारी होने के समय नाबालिग था।
कोर्ट ने पाया कि पासपोर्ट अधिकारी ने इस विशेष छूट पर ध्यान नहीं दिया और केवल उस जन्म प्रमाणपत्र में दर्ज तारीख के आधार पर आवेदन खारिज कर दिया, जिसे पहले पासपोर्ट बनवाते समय पेश किया गया।
जस्टिस परिहार ने कहा कि जब याचिकाकर्ता ने बाद का पासपोर्ट मांगा, तब तक उसके स्कूल रिकॉर्ड सुधारे जा चुके थे, पुराना जन्म प्रमाणपत्र रद्द हो चुका था और सक्षम प्राधिकारी की ओर से सही जन्मतिथि प्रमाणित की जा चुकी थी।
कोर्ट ने कहा,
“पासपोर्ट अधिकारी ने याचिकाकर्ता के मामले पर विचार नहीं किया और केवल इस आधार पर उसे खारिज कर दिया कि पहले पासपोर्ट के समय पेश जन्म प्रमाणपत्र में जन्मतिथि 12 जुलाई 2004 दर्ज थी।”
पीठ ने कहा कि पासपोर्ट अधिकारी को परिपत्र में नाबालिगों के लिए दी गई विशेष छूट को ध्यान में रखते हुए मामले पर विचार करना चाहिए था। पहले पासपोर्ट को जारी हुए कितना भी समय बीत चुका हो, प्राधिकरण को याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों के आधार पर जन्मतिथि सुधारने के अनुरोध पर विचार करना जरूरी था।
विदेश जाकर मेडिकल पढ़ाई के लिए पासपोर्ट जरूरी
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की तत्काल जरूरत को भी ध्यान में रखा। उसने 2025 की NEET परीक्षा उत्तीर्ण की थी और किर्गिस्तान के बिश्केक स्थित इंटरनेशनल हायर स्कूल ऑफ मेडिसिन में 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए मेडिकल कोर्स में एडमिशन हासिल किया। विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में भी उसकी जन्मतिथि 25 मई 2008 दर्ज थी।
कोर्ट ने कहा कि सही जन्मतिथि वाला पासपोर्ट जारी करने से इनकार करने का सीधा असर याचिकाकर्ता की विदेश जाकर मेडिकल शिक्षा हासिल करने की क्षमता पर पड़ेगा।
पीठ ने कहा,
“सही जन्मतिथि वाला पासपोर्ट जारी करने से इनकार करना याचिकाकर्ता के स्वतंत्र आवागमन के अधिकार को प्रभावित करेगा, खासकर ऐसे समय में जब उसे मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश में एडमिशन मिला है।”
अदालत ने स्कूल के संशोधित रिकॉर्ड, नए जन्म प्रमाणपत्र और पुराने प्रमाणपत्र रद्द किए जाने के तथ्य को देखते हुए पासपोर्ट प्राधिकरण की ओर से सुधार पर विचार नहीं करने को टिकाऊ नहीं माना।
हाईकोर्ट ने प्राधिकरण की निष्क्रियता को मनमाना और अनुचित तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट कानून और लागू नियमों के तहत शैक्षणिक प्रमाणपत्र और जन्म प्रमाणपत्र जन्मतिथि के वैध प्रमाण के रूप में स्वीकार किए जा सकते हैं।
अदालत ने याचिका मंजूर करते हुए पासपोर्ट प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह मैट्रिक प्रमाणपत्र के आधार पर सही जन्मतिथि दर्ज करते हुए नया पासपोर्ट जारी करने के आवेदन पर विचार करे। यह पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रति प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी।