RTI अपीलों के निस्तारण के लिए 45 दिन की समयसीमा तय करने से हाईकोर्ट का इनकार, CIC को लंबित मामलों के समाधान की व्यवस्था सुधारने का निर्देश

Update: 2026-07-06 11:51 GMT

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत दूसरी अपीलों का निस्तारण 45 दिनों के भीतर करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया।

अदालत ने कहा कि RTI Act, 2005 में दूसरी अपीलों और शिकायतों के निस्तारण के लिए कोई वैधानिक समयसीमा निर्धारित नहीं है, इसलिए अदालत ऐसी समयसीमा तय नहीं कर सकती।

हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग अपीलों को वर्षों तक लंबित नहीं रख सकता। उसे लंबित मामलों का बोझ कम करने और नए मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करनी होगी।

एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस मोहम्मद यूसुफ वानी की खंडपीठ बारामूला जिले के उरी निवासी जुनैद जाविद द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश से संबंधित सभी लंबित दूसरी अपीलों का निस्तारण 45 दिनों के भीतर करने का निर्देश सीआईसी को दिया जाए। साथ ही आयोग में समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत व्यवस्था विकसित करने की भी मांग की गई।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार और लंबित मामलों को कम करने संबंधी कुछ सुझाव भी अदालत के समक्ष रखे, जिन्हें अदालत ने रिकॉर्ड पर लेने की अनुमति दी।

सीआईसी ने अपने जवाब में कहा कि मौजूदा संसाधनों और बड़ी संख्या में लंबित दूसरी अपीलों एवं शिकायतों को देखते हुए सभी मामलों का किसी निश्चित समयसीमा के भीतर निस्तारण करना व्यावहारिक नहीं है।

हाईकोर्ट ने कहा,

"सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 में दूसरी अपीलों और शिकायतों के निस्तारण के लिए कोई समयसीमा निर्धारित नहीं है। इसलिए हम रिट जारी कर आयोग को 45 दिनों के भीतर सभी मामलों का निस्तारण करने का निर्देश नहीं दे सकते।"

हालांकि अदालत ने यह भी कहा,

"इसका यह अर्थ नहीं है कि केंद्रीय सूचना आयोग अपीलों पर वर्षों तक बैठा रहे और उनका निस्तारण न करे।"

खंडपीठ ने माना कि आयोग के सामने आधारभूत ढांचे और लंबित मामलों की संख्या जैसी व्यावहारिक चुनौतियां हैं, लेकिन इसके बावजूद उसे अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना होगा।

अदालत ने कहा कि आयोग को ऐसी प्रभावी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिससे मौजूदा लंबित मामलों का बोझ कम हो सके और भविष्य में आने वाली नई अपीलों एवं शिकायतों का भी समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए सुझावों पर CIC विचार कर सकता है। यदि वे वास्तविक, व्यावहारिक और उपयोगी पाए जाते हैं तो उन्हें लागू करने पर भी विचार किया जा सकता है।

इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए केंद्रीय सूचना आयोग को लंबित मामलों की समस्या पर गंभीरता से विचार करने तथा उपलब्ध संसाधनों और परिस्थितियों के अनुसार अपनी कार्यप्रणाली में आवश्यक सुधार के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश दिया।

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