गर्भवती नाबालिग को मेडिकल केयर प्रदान करने के लिए अस्पताल पूर्व शर्त के रूप में पुलिस शिकायत पर जोर नहीं दे सकते: बॉम्बे हाईकोर्ट

Update: 2024-04-12 09:33 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य सरकार को एक 17 वर्षीय गर्भवती लड़की को मेडिकल केयर प्रदान करने का निर्देश दिया। लड़की ने अपने नाबालिग साथी, जिसके कारण वह गर्भवती हुई ‌थी, उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई थी, जिसके परिणामस्वरूप उसे मेडिकल सुविधाएं देने से इनकार कर दिया गया था।

जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस फिरदोश पी पूनीवाला की खंडपीठ ने आदेश में कहा कि अस्पताल इस बात पर जोर नहीं दे सकते कि लड़की की मां मेडिकल ट्रीटमेंट पाने की शर्त के रूप में पुलिस में शिकायत दर्ज कराए।

कोर्ट ने कहा,

“तथ्य स्पष्ट हैं कि याचिकाकर्ता की बेटी के नाबालिग लड़के के साथ संबंध सहमति से बने थे। याचिकाकर्ता के रूप में न तो माता-पिता और न उनकी बेटी यह कह रही है कि वह पीड़ित है, और हक़ीकत यह है कि वह अपने कार्यों के प्रति सचेत और जागरूक थी, इसलिए वे पोक्सो एक्ट, 2012 के प्रावधानों के तहत पुलिस शिकायत दर्ज करने के इच्छुक नहीं हैं..केवल इस वजह से कि पुलिस शिकायत नहीं है, याचिकाकर्ता की बेटी को चिकित्सा सहायता प्रदान करने इनकार नहीं किया जा सकता है।'

अदालत लड़की की मां की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही था। याचिकाकर्ता की शिकायत यह थी कि बेटी ने लड़के के खिलाफ, जिसके कारण वह गर्भवती हुई थी, कानूनी कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है, इसके बाद भी उसे चिकित्सा सुविधा प्रदान करने से पहले पुलिस शिकायत की मांग की जा रही है।

बेटी ने दावा किया कि उनका रिश्ता सहमति से बना था। याचिका में बच्चे को गोद देने का इरादा व्यक्त किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील निगेल कुरैशी ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अपनी बेटी के लिए सर जेजे ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स में इलाज की मांग की है और उन्होंने एक आश्रय गृह सेंट कैथरीन होम की भी पहचान की है, जो उनकी बेटी को रखने के लिए तैयार है। कोर्ट ने शेल्टर होम से जुड़े बयान को स्वीकार कर लिया और राज्य के अधिकारियों को बेटी के दाखिले की सुविधा देने का निर्देश दिया।

सरकारी वकील पूर्णिमा कंथारिया ने कहा कि बेटी अपनी पहचान उजागर किए बिना सर जेजे ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स में इलाज करा सकती है, हालांकि याचिकाकर्ता से एक औपचारिक बयान मांगा कि उनकी बेटी पुलिस शिकायत दर्ज नहीं करना चाहती है। कंथारिया ने कहा कि इसे 'आपातकालीन पुलिस रिपोर्ट' (ईपीआर) के रूप में बनाने की जरूरत है।'

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से ईपीआर पेश करने में कोई बुराई नहीं है और ऐसे ईपीआर को सरकारी वकील को सौंपा जा सकता है, जो इसे सीलबंद कवर में रख सकता है। अदालत ने कहा कि जब जरूरत पड़ेगी तो अदालत की पूर्व अनुमति से इसका इस्तेमाल उचित उद्देश्य के लिए किया जा सकता है।

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि शिकायत के अभाव के आधार पर चिकित्सा सहायता से इनकार करना स्वास्थ्य देखभाल के संवैधानिक अधिकार का खंडन है।

इस प्रकार, अदालत ने सर जेजे ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स को गोपनीयता सुनिश्चित करने और पुलिस शिकायत की आवश्यकता के बिना याचिकाकर्ता की बेटी को छद्म नाम से चिकित्सा देखभाल प्रदान करने का निर्देश दिया। इसने याचिकाकर्ता को अस्पताल में मातृत्व देखभाल और प्रसव सेवाओं तक पहुंच प्रदान की और बेटी के लिए स्वतंत्र चिकित्सा उपचार सुरक्षित करने के प्रयासों का निर्देश दिया।

सेंट कैथरीन होम को याचिकाकर्ता की बेटी को बच्चे के जन्म तक देखभाल और सहयोग प्रदान करने और पूरी प्रक्रिया में गोपनीयता बनाए रखने का निर्देश दिया गया। अदालत ने बच्चे को गोद लेने के संबंध में याचिकाकर्ता की दलीलों को खुला रखते हुए याचिका को निस्तारित किया।

केस नंबरः रिट पीटिशन (एल) नंबर 12243/2024

केस टाइटलः XYZ बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य।

ऑर्डर पढ़ने/डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

Tags:    

Similar News