गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार (3 नवंबर) को रेप के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे नारायण साईं की अस्थायी जमानत याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।

नारायण साईं ने अपनी बीमार मां से मिलने के लिए अस्थायी जमानत देने की मांग की।

नारायण साईं ने अपनी सजा और दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली अपील के साथ यह अस्थायी जमानत याचिका दाखिल की है।

जस्टिस भार्गव डी. करिया और जस्टिस हेमंत एम. प्रच्छक की खंडपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा,

“नोटिस जारी किया जाता है। जवाब के लिए 27 नवंबर की तारीख तय की जाती है।”

राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सरकारी अभियोजक ने प्रतिवादियों की ओर से नोटिस की तामील स्वीकार की।

नारायण साईं के वकील ने उनकी मां की खराब सेहत और याचिकाकर्ता के खुद कई बीमारियों से पीड़ित होने का हवाला देते हुए मामले की सुनवाई के लिए पहले की तारीख देने का अनुरोध किया।

नारायण साईं को 30 अप्रैल 2019 को सूरत की सत्र अदालत ने रेप सहित कई अपराधों में दोषी ठहराया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(f), 376(k), 376(n), 377, 354, 323, 504 और 506(2) के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद की कठोर सजा सुनाई थी।

इन धाराओं में भरोसे या अधिकार की स्थिति में रहते हुए महिला से रेप, शारीरिक या मानसिक रूप से दिव्यांग महिला से रेप, एक ही महिला के साथ बार-बार रेप, अप्राकृतिक अपराध, महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से हमला, स्वेच्छा से चोट पहुंचाना, जानबूझकर अपमान करना और आपराधिक धमकी देना शामिल हैं।

नारायण साईं दिसंबर 2013 से जेल में बंद है।

इससे पहले मई में हाईकोर्ट की समकक्ष पीठ ने उसकी उम्रकैद की सजा निलंबित करने की मांग वाली याचिका खारिज की थी। उस समय कोर्ट ने प्रथम दृष्टया कहा था कि नारायण साईं अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील की जल्द सुनवाई कराने में रुचि नहीं दिखा रहा है और कार्यवाही में देरी करने के तरीके अपना रहा है।

अब अस्थायी जमानत याचिका पर 27 नवंबर को सुनवाई होगी। इसी दिन नारायण साईं की मुख्य अपील भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।


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