पत्नी को बार-बार 100 किमी की यात्रा से राहत, गुजरात हाईकोर्ट ने वैवाहिक मुकदमा कच्छ ट्रांसफर किया
गुजरात हाईकोर्ट ने पत्नी को होने वाली यात्रा की परेशानी और छोटे बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए वैवाहिक मुकदमे को मोरबी की फैमिली कोर्ट से कच्छ के भचाऊ स्थित न्यायालय में स्थानांतरित करने का आदेश दिया।
जस्टिस मौलिक जे. शेलट ने मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए कहा कि पत्नी को होने वाली असुविधा पति की तुलना में कहीं अधिक है। पत्नी कच्छ जिले के रापर में रह रही थी, जबकि मुकदमे की सुनवाई मोरबी में चल रही थी। दोनों स्थानों के बीच एक तरफ की दूरी करीब 100 किलोमीटर बताई गई।
पत्नी ने हाईकोर्ट को बताया कि उसे मुकदमे की सुनवाई के लिए बार-बार मोरबी जाना पड़ता है और साथ ही वह अपनी नाबालिग बेटी की देखभाल भी कर रही है। उसने यह भी कहा कि पारिवारिक अदालत के आदेश के बावजूद पति ने उसे भरण-पोषण की राशि का नियमित भुगतान नहीं किया।
अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि भरण-पोषण की राशि का भुगतान नहीं करने पर पति को जेल जाना पड़ा था और बकाया राशि चुकाने के बाद वह हाल में जेल से बाहर आया है।
जस्टिस शेलट ने कहा,
“प्रथम दृष्टया इस अदालत के पास यह मानने का कारण है कि प्रतिवादी आवेदक और अपनी नाबालिग बेटी के भरण-पोषण के लिए नियमित राशि देने की स्थिति में नहीं है।”
हाईकोर्ट ने कहा कि पूरे मामले के तथ्यों और परिस्थितियों तथा दोनों पक्षों को होने वाली असुविधा को देखते हुए पत्नी के पक्ष में विवेकाधिकार का इस्तेमाल करना उचित है।
पति की ओर से दलील दी गई कि पत्नी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुकदमे की कार्यवाही में शामिल हो सकती है। हाईकोर्ट ने इस विकल्प को भी खुला रखा। अदालत ने कहा कि मुकदमा स्थानांतरित होने के बाद पति संबंधित अदालत से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या ऑनलाइन माध्यम से कार्यवाही में शामिल होने का अनुरोध कर सकता है।
अदालत ने कहा कि भचाऊ की संबंधित अदालत इस अनुरोध पर विचार कर सकती है, जब तक कि कार्यवाही के किसी विशेष चरण में पति की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक न हो।
हाईकोर्ट ने पत्नी की याचिका स्वीकार करते हुए वैवाहिक मुकदमे को मोरबी से भचाऊ, कच्छ स्थानांतरित करने का आदेश दिया।