तीन तलाक के लिए पति को उकसाने के आरोप में पांच रिश्तेदारों को गुजरात हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत
गुजरात हाईकोर्ट ने पत्नी को तीन तलाक देने के लिए पति को कथित तौर पर उकसाने के मामले में आरोपी बनाए गए पांच रिश्तेदारों को अग्रिम जमानत दी।
जस्टिस संजीव जे. ठक्कर ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ मुख्य आरोप पति का समर्थन करने और उसे शिकायतकर्ता पत्नी को तलाक देने के लिए उकसाने का है। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपियों के खिलाफ दर्ज अपराधों में उम्रकैद या मृत्युदंड का प्रावधान नहीं है और उनके खिलाफ पहले का कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने नहीं आया है।
पांचों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 85, 351(2) और 54 तथा मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम की धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोपियों ने गिरफ्तारी की आशंका के चलते अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।
मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम के तहत तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत पर रोक है। इस कानून की धारा 4 के अनुसार, पत्नी को तीन तलाक देने वाले मुस्लिम पति को अधिकतम तीन वर्ष तक की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है।
सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से कहा गया कि वे जांच में सहयोग करेंगे, न्याय से नहीं भागेंगे और जांच तथा मुकदमे के दौरान उपलब्ध रहेंगे।
हाईकोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अग्रिम जमानत मंजूर की। अदालत ने आदेश दिया कि यदि संबंधित प्राथमिकी के सिलसिले में आरोपियों को गिरफ्तार किया जाता है या वे अदालत के समक्ष पेश होते हैं, तो उन्हें 10-10 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक-एक जमानती पर जमानत पर रिहा किया जाए।
अदालत ने अग्रिम जमानत देते हुए जांच में सहयोग सहित अन्य शर्तों का पालन करने का भी निर्देश दिया।